वेद-मंत्रोच्चार और अन्य रीति-रिवाजों के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए गए हैं.

इसके साथ ही उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में चार प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों की छह महीने लंबी चलने वाली ‘चारधाम’ यात्रा शुरू हो गई.

इससे पहले उत्तरकाशी जिले में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सुबह-सुबह ही देवी गंगा और यमुना की मूर्तियों को पालकी में बैठाकर उनके अपने-अपने मंदिरों में ले जाया गया, जहां मुख्य पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच मूर्तियों को गर्भगृह में स्थापित किया. गौरतलब है कि सर्दियों में देवी गंगा की मूर्ति को मुखबा मंदिर और देवी यमुना की मूर्ति को खरसाली मंदिर में रख दिया जाता है.

इस मौके पर सेना के बैंड ने धार्मिक भजनों की धुन बजाई, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद तीर्थयात्री ‘हर हर गंगे’ के नारे लगा रहे थे. बहुत से तीर्थयात्रियों ने भागीरथी और यमुना के पवित्र जल में डुबकियां भी लगाईं.

दो और हिंदू मंदिरों केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट बुधवार और गुरुवार को तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए जाएंगे.

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहन लाल थपलियाल ने कहा कि केदारनाथ मंदिर परिसर में अभी भी भारी बर्फ जमी हुई है, लेकिन मंदिर जाने वाले मार्ग को साफ कर दिया गया है.

रुद्रप्रयाग जिले में 11,755 फुट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में जनवरी-फरवरी में हुई भारी बर्फबारी के बाद बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके बाद सरकार ने 15 से 20 फुट की ऊंचाई तक फैली बर्फ को साफ करने और नष्ट हुई संरचनाओं को फिर से बनाने का काम किया था.

सरकार ने लगभग 3000 तीर्थयात्रियों के लिए केदारनाथ में रात को ठहरने की व्यवस्था की है.

अधिकांश बर्फ पहले ही पिघल चुकी है, लेकिन केदारनाथ में अभी भी 4 से 5 फुट बर्फ है, जिसका तीर्थयात्री आनंद ले सकते हैं.

थपलियाल ने कहा, ‘हमारी ओर से, बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों की यात्रा के सुचारु संचालन के सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं’.

हालांकि, उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर अभी भी एक पुल खराब स्थिति में है, जिस पर मरम्मत कार्य जारी है.

जिला मजिस्ट्रेट आशीष चौहान ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि पुनर्निर्माण के सभी कार्य सात मई तक पूरे हो जाएंगे. वहीं गंगोत्री मंदिर का कोई मुद्दा लंबित नहीं है’.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारों धर्मस्थलों की सफल यात्रा का तीर्थयात्रियों को आश्वासन दिया. उन्होंने कहा, ‘चारधाम यात्रा के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों के स्वागत के लिए उत्तराखंड तैयार है. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और विभिन्न अन्य सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा’.

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