गणेश चतुर्थी पर कई लोग अपने घरों में बप्पा को स्थापित करते हैं और उनकी सेवा करते हैं. कई लोग बप्पा को एक,तीन,पांच या दस दिन के बाद विदा कर देते हैं वहीं कुछ लोग पूरे 10 दिन बप्पा को अपने घर में रखते हैं. हर पूजा के बाद लोग मूर्ति का विसर्जन कर देते हैं फिर चाहे वो मां दुर्गा की क्यों ना हो. हर साल लोग घरों में नए लक्ष्मी-गणेश भी स्थापित करते हैं. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है की आखिर क्यों हम बप्पा को अलविदा विर्सजन करके ही करते हैं. Also Read - मिसाल: एक पांडाल में साथ मनाई जा रही गणेश चतुर्थी-मुहर्रम, ऐसा और कहां मिलेगा...

बप्पा को विसर्जन बिल्कुल वैसे ही होता है जैसे वो घर पर आते हैं. गाजे बाजे के साथ लोग गणपति को अपने घर पर लाते हैं उनकी पूजा करते हैं. ठीक उसी तरह बप्पा का विसर्जन भी धूमधाम से होता है. मानते हैं की बिना विसर्जन बप्पा की पूजा पूरी नहीं होती है. ऐसे में विसर्जन करना बेहद जरुरी है, तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है इसकी पीछे की कहानी. Also Read - Ganesh Chaturthi 2020: भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, घर में आएगी शांति और मिलेगी समृद्धि

जल तत्व के आधिपति हैं गणपति
भगवान गणेश को जल तत्व के अधिपति कहा जाता है, लेकिन मुख्या कारण तो उनके विसर्जन का यही है की अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति की पूजा अर्चना के बाद उन्हें वापस जल में विसर्जित कर देते हैं. यानि वो जहां के अधिपति हैं उन्हें वहां पर उन्हें पहुंचा दिया जाता है. लेकिन पुराणों में इसे लेकर कई और बातें औऱ कहानिया हैं. Also Read - Ganesh Chaturthi Special Bhog Recipe: गणपति बप्पा को लगाएं नारियल से बने चावल का भोग, बेहद आसान है रेसिपी

महाभारत से जुड़ी है कहानी
पुराणों में कहा गया है की श्री वेद व्यास जी गणपति जी को गणेश चतुर्थी से महाभारत की कथा सुनानी शुरु की थी और गणपति से उसे लिख रहे थे. इस दौरान व्यास जी ने अपनी आंख बंद कर ली और लगातार दस दिनों तक कथा सुनाते गए और गणपति जी लिखते गए. दस दिन बाद जब व्यास जी ने अपनी आंखे खोली तो उस वक्त गणपित के शरीर का तापमान बेहद बढ़ गया था, जिस कारण व्यास जी ने गणेश जी के शरीर को ठंडा करने के लिए उन्हें जल में डुबई लगवाई जिसके बाद उनका शरीर शांत हो गया. तभी से मान्‍यता है कि गणेश जी को शीतल करने के लिए उनका विसर्जन करते हैं. इसके बाद व्यास जी ने 10 दिनों तक गणपति जी को उनके पसंद का भोजन कराया था. इसी मान्यता के अनुसार प्रभु की पूजा के बाद उनका विसर्जन किया जाता है.