धन-धान्‍य, वैभव की चाह भले किसे नहीं होती. इसी आस में लोग जीवन भर कठिन परिश्रम करते हैं. Also Read - Diwali 2020: दिवाली पर देवी लक्ष्‍मी को क्‍यों चढ़ाए जाते हैं खील-बताशे?

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मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पर कई बार पूजा-पाठ, कठिन मेहनत के बाद भी वो सफलता नहीं मिलती जिसकी लोगों को चाह होती है.

इसीलिए शास्‍त्रों में कुछ ऐसे मंत्र बताए गए हैं-

नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।

शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोस्तुते॥1॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि।

सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥2॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि।

सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥3॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।

मंत्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥4॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।

योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोस्तुते॥5॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।

महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते॥6॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।

परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोस्तुते॥7॥

बिल्‍ली रास्‍ता काट दे तो क्‍यों रुक जाते हैं आप? क्‍यों माना जाता है अशुभ?

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते।

जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोस्तुते॥8॥

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः।

सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥9॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।

द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥10॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।

महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥11॥

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