Goverdhan Puja 2018: गोवर्धन पूजन के आज तीन मुहूर्त, जानिये विधि और कथा

श्रीकृष्ण ने छोटी अंगूली पर उठाया था गोवर्धन पर्वत

Published date india.com Updated: November 8, 2018 10:31 AM IST
Goverdhan Puja 2018: गोवर्धन पूजन के आज तीन मुहूर्त, जानिये विधि और कथा
गोवर्द्धन पूजा

Goverdhan Puja 2018: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन जातक भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण की पूजा करते हैं. इस दिन को श्री कृष्ण ने सबसे छोटी अंगूली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था. इस त्योहार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह त्योहार दरअसल प्राकृतिक संसाधनों के संचयन से जुड़ा है. इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग चढ़ाते हैं. अन्नकुट पूजा होती है, जिससे यह याद रहे कि भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र को हराया था. महाराष्ट्र और गुजरात में इसे गुड़ी पड़वा की तरह मनाया जाता है. यहां इसे नये साल की शुरुआत भी मानते हैं.

Govardhan Puja 2018: गोवर्धन पूजा की तारीख और मुहूर्त

गोवर्धन पूजा तिथि: 8 नवंबर 2018

गोवर्धन पूजा प्रात: काल मुहूर्त : सुबह 6:45 से 08:57 बजे तक

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गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त : शाम 3:32 से 5:43 बजे तक

प्रतिपदा तिथि कब से शुरू : 7 नवंबर को रात 9:31 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त : 8 नवंबर को रात 9:07

Goverdhan Puja 2018: जानिये कब है गोवर्धन पूजन, क्या है महत्व

Govardhan Puja 2018: गोवर्धन पूजा की विधि

– स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें.

– घर के आगे गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत और कृष्ण बनाएं.

– पर्वत पर पेड़ पौधेे भी होते हैं, इसलिए इस पर पेड़ पौधे और झाड़ आदि लगाएं.

– पर्वत की पूजा के लिए रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल चढ़ाएं.

– इस मंत्र का जाप करें

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।

विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव: ।।

– घर में अगर गाय है तो उनका श्रृंगार करें और उनकी पूजा करें. अन्यथा उनकी तस्वीर की पूजा कर सकते हैं.

– गायों को नैवेद्य खिलाएं और भोग लगाएं.

– गोवर्द्धन पर्वत और गायों की आरती उतारें.

– पूजा के बाद पर्वत की सात परिक्रमाएं करें.

– शाम को गोबर से बने गोवर्द्धन पर्वत पर पूजित गाय को चलवाएं.

– अब उसी गोबर से घर आंगन लीपें या उपले बनाएं.

– इस दिन इंद्र, वरुण, अग्नि और भगवान विष्‍णु की पूजा और हवन भी किया जाता है.

गोवर्धन कथा

शास्त्रों में ऐसी व्याख्या है कि वृंदावन के लोग हर साल भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए खूब सारा चढ़ावा चढ़ाते थे. ताकि भगवान इंद्र प्रसन्न रहें और किसानों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और समय-समय पर फसलों के अनुसार बारिश करते रहें. बाल कृष्ण ने पाया कि ऐसा करने में किसानों पर भार बढ़ जाता है और वह अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भगवान इंद्र को प्रसन्न करने में लगा देते हैं.

बाल कृष्ण ने किसानों से कहा कि वह भगवान इंद्र को चढ़ावा चढ़ाना बंद करें और अपनी आय से अपने परिवार का भरण पोषण करें. जब इंद्र ने पाया कि किसानों ने चढ़ावा चढ़ाना बंद कर दिया है तो वह नाराज हो गए और वृंदावन वासियों पर अपना कहर बरसाने लगे. कई दिनों तक बारिश होती रही. सभी वृंदावन वासी जीवन खोने के भय से कृष्ण के पास पहुंचे और उनसे उपाय मांगा.

कृष्ण ने वृंदावन वासियों की सहायता करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगूली पर ही उठा लिया. गांव के सभी लोग उस पर्वत के नीचे आकर खड़े हो गए ताकि बारिश और तुफान से रक्षा हो सके.

कृष्ण 7 दिनों तक अपनी कानी अंगूूली यानी सबसे छोटी अंगूली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर रखा. आखिरकार इंद्र ने बारिश और तुफान रोक लिया. इसके बाद वृंदावन की महिलाओं ने श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोजन तैयार किए. ऐसा कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने एक दिन में 8 बार भोजन ग्रहण किया था. क्योंकि पिछले सात दिनों के दौरान उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया था.

इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन छप्पन भोग बनाने का प्रचलन है, जिसमें हलवा, लड्डू, मिश्री और पेड़ा जरूर होता है. इसके अलावा मक्खन मिश्री, खीर, रसगुल्ला, जीरा लड्डू, जलेबी, रबरी, मठरी, मालपुवा, मोहन भोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चिला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी आदि भी होती है.

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