Govardhan Puja Samagri List: इस सामग्री के बिना अधूरी होती है गोवर्धन पूजा, यहां देखें पूरी लिस्ट और जानें पूजा की सही विधि

Govardhan Puja Samagri List: दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है जिसे अन्नकूट भी कहते हैं. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा बनाकर उसका विधि-विधान से पूजन किया जाता है.

Published date india.com Published: October 21, 2025 8:57 AM IST
Govardhan Puja Samagri List: इस सामग्री के बिना अधूरी होती है गोवर्धन पूजा, यहां देखें पूरी लिस्ट और जानें पूजा की सही विधि

Govardhan Puja Samagri List: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गोवर्धन पूजा होती है और यह तिथि दिवाली के अगले दिन आती है. लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिन रहेगी और इसलिए गोवर्धन पूजा का पर्व 21 अक्टूबर की बजाय 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है और इस दिन गोबर से गोवर्धन प्रतिमा बनाई जाती है और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण कर उसका पूजन किया जाता है. ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व माना गया है और इस पर्व का सीधा संबंध प्रकृति से है. इस दिन खास तरीके से पूजा की जाती है और इसलिए ध्यान रखें कि पूजा के समय किसी चीज की कमी न रहे. ऐसे में यहां देखें गोवर्धन पूजा की सामग्री लिस्ट.

गोवर्धन पूजा सामग्री लिस्ट

  • गोबर: गोवर्धन पर्वत बनाने के लिए
  • मिट्टी का दीपक: गोवर्धन पर्वत की पूजा में दीपक जलाने के लिए
  • घी और बाती: दीपक जलाने के लिए
  • गंगाजल या शुद्ध जल: एक लोटे में शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर छिड़काव के लिए
  • चांदी का सिक्का: गोवर्धन की प्रतिमा के पूजा के लिए

अन्नकूट और भोग सामग्री

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन मौसम के अनुसार मिलने वाली सभी सब्जियों को मिलाकर कढ़ी बनाई जाती है. जो कि स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी मानी गई है. ब्रज क्षेत्र में दिन कढ़ी-बाजरा बनाया व खाया जाता है. वहीं गोवर्धन पूजा में भोग के लिए मीठे पुए बनाए जाते हैं और पूजा की थाली में 8 पुए रखे जाते हैं जिसे अठावरी कहते हैं. गोवर्धन की प्रतिमा को भोग लगाने के बाद ये पुए प्रसाद के तौर पर बांटे जाते हैं.

ऐसे करें गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा के दिन सबसे पहले घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है और उसे एक स्वरूप देकर सजाया जाता है. इसके बाद घर के मुखिया गोवर्धन की प्रतिमा को हल्दी का तिलक लगाते हैं और दीपक जलाते हैं. फिर सभी सदस्य हाथ में खील लेकर गोवर्धन की प्रतिमा की 7 बार परिक्रमा लगाते हैं. इस दौरान थोड़ी-थोड़ी खील अर्पित की जाती है. फिर पुए का भोग लगाया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है. पूजा के दौरान मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और गलती के लिए क्षमा मांगें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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