Goverdhan Puja 2018 Date and Time : दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा होती है. इस साल गोवर्धन पूजा 8 नवंबर 2018 को है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन का खास महत्व है. खासतौर से कृष्ण भक्तों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है. भगवान श्री कृष्ण को गोवर्धन धारी भी कहा जाता है. गोवर्धन पूजा दरअसल, भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है. जानिये यह पर्व कैसे मनाया जाता है, इसका क्या महत्व है और पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है.
Govardhan Puja 2018: गोवर्धन पूजा की तारीख और मुहूर्त
गोवर्धन पूजा तिथि: 8 नवंबर 2018
गोवर्धन पूजा प्रात: काल मुहूर्त : सुबह 6:45 से 08:57 बजे तक
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गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त : शाम 3:32 से 5:43 बजे तक
प्रतिपदा तिथि कब से शुरू : 7 नवंबर को रात 9:31 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त : 8 नवंबर को रात 9:07
गोवर्धन पूजा 2018 महत्व
शास्त्रों में ऐसी व्याख्या है कि वृंदावन के लोग हर साल भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए खूब सारा चढ़ावा चढ़ाते थे. ताकि भगवान इंद्र प्रसन्न रहें और किसानों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और समय-समय पर फसलों के अनुसार बारिश करते रहें. बाल कृष्ण ने पाया कि ऐसा करने में किसानों पर भार बढ़ जाता है और वह अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भगवान इंद्र को प्रसन्न करने में लगा देते हैं.
बाल कृष्ण ने किसानों से कहा कि वह भगवान इंद्र को चढ़ावा चढ़ाना बंद करें और अपनी आय से अपने परिवार का भरण पोषण करें. जब इंद्र ने पाया कि किसानों ने चढ़ावा चढ़ाना बंद कर दिया है तो वह नाराज हो गए और वृंदावन वासियों पर अपना कहर बरसाने लगे. कई दिनों तक बारिश होती रही. सभी वृंदावन वासी जीवन खोने के भय से कृष्ण के पास पहुंचे और उनसे उपाय मांगा.
कृष्ण ने वृंदावन वासियों की सहायता करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगूली पर ही उठा लिया. गांव के सभी लोग उस पर्वत के नीचे आकर खड़े हो गए ताकि बारिश और तुफान से रक्षा हो सके.
कृष्ण 7 दिनों तक अपनी कानी अंगूूली यानी सबसे छोटी अंगूली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर रखा. आखिरकार इंद्र ने बारिश और तुफान रोक लिया. इसके बाद वृंदावन की महिलाओं ने श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोजन तैयार किए. ऐसा कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने एक दिन में 8 बार भोजन ग्रहण किया था. क्योंकि पिछले सात दिनों के दौरान उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया था.
इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन छप्पन भोग बनाने का प्रचलन है, जिसमें हलवा, लड्डू, मिश्री और पेड़ा जरूर होता है. इसके अलावा मक्खन मिश्री, खीर, रसगुल्ला, जीरा लड्डू, जलेबी, रबरी, मठरी, मालपुवा, मोहन भोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चिला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी आदि भी होती है.
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