Gupt Navratri. हमारे देश में आम तौर पर चैत्र और आश्विन नवरात्र मनाने का ही प्रचलन है, लेकिन धार्मिक विचारों पर जीने वाले श्रद्धालु विशेष अवसरों पर आने वाले पूजा-संस्कारों को भी नहीं भूलते हैं. इन्हीं विशिष्ट अवसरों में से एक है गुप्त नवरात्र. हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस बार ग्रीष्मकालीन गुप्त नवरात्र अगले बुधवार यानी 3 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है. आचार्य डॉ. विकास नाथ झा के मुताबिक, मां दुर्गा की आराधना यूं तो सालोंभर की जा सकती है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में माता के सभी नौ रूपों की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अगर कोई साधक गुप्त नवरात्र के दिनों में भी मां दुर्गा की आराधना करता है, तो देवी उस पर बहुत प्रसन्न होती हैं.

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गुप्त नवरात्र की महिमा के बारे में डॉ. विकास नाथ झा ने बताया कि चैत्र और आश्विन नवरात्रि की तरह ही इसमें भी मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्र के सभी नौ दिन भक्तों की कामना पूरी करने वाले होते हैं. उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में जातक चाहे किसी भी राशि का हो, अगर वह पूरी निष्ठा के साथ मां दुर्गा की आराधना करे तो देवी मां उसकी हर कामना निश्चित रूप से पूरी करती हैं. आचार्य ने बताया कि नवरात्र के सभी नौ दिन सर्वार्थ सिद्धियोग वाले होते हैं. यानी इन नौ दिनों में पूजा-आराधना करने वालों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है.

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आचार्य डॉ. झा ने बताया कि गुप्त नवरात्र का आरंभ आर्द्रा नक्षत्र में हो रहा है. शुभ दिन में इसकी शुरुआत होने से मिथुन, वृष और धनु राशि के जातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है. वैसे अन्य राशि के जातक भी यदि मां दुर्गा की निष्ठापूर्वक आराधना करते हैं, तो उन्हें भी देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. लेकिन इन तीन राशि के जातकों के घर में यदि गृह क्लेश, मानसिक या शारीरिक रोग, आर्थिक संकट जैसी समस्याएं हैं, तो ऐसे लोगों को गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना जरूर करनी चाहिए. डॉ. झा ने बताया कि उक्त राशि के जातकों को इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नीचे लिखे मंत्र के साथ दुर्गा सप्तशती का संपुट पाठ करना चाहिए.

”ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम्।
त्रिशूलं पातुनोभीतेर्भद्रकालि नमोस्तु ते।।”

डॉ. झा ने बताया कि कालसर्प योग से पीड़ित अन्य राशि के जातकों के लिए भी गुप्त नवरात्र में विभिन्न दोषों से निवारण का समाधान है. विभिन्न राशियों के जातक अगर कालसर्प योग से ग्रस्त हैं, तो उन्हें गुप्त नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि यानी आगामी 10 जुलाई को लाल या काला वस्त्र धारण कर ऊपर लिखे मंत्र से 1008 बार हवन कराना चाहिए. डॉ. झा के अनुसार इस मंत्र के साथ हवन करने से मां दुर्गा अपने भक्तों की आराधना से प्रसन्न होंगी और जातक की सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा.

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आचार्य के मुताबिक मेष, कर्क, सिंह और तुला राशि के जातकों की समस्याओं के समाधान के लिए गुप्त नवरात्र के सभी नौ दिन काफी लाभकारी हैं. उन्होंने बताया कि इन राशियों के जातक आटा का दीपक बनाकर तिल के तेल के साथ दीप और धूप जलाकर नवरात्रारंभ से लेकर नवमी पर्यंत तक आराधना करें. आराधना के लिए नीचे लिखे मंत्र का जाप करें, तो निश्चित रूप से मां दुर्गा प्रसन्न होंगी और जातक की समस्या से उसे निजात मिल जाएगा. उन्होंने बताया कि इस मंत्र का जाप करने से जिन जातकों को नौकरियों में बाधा आ रही है, वह भी दूर हो जाएगी.

”दुर्वृत्तानामशेषाणां बलहानिकरं परम्।
रक्षोभूतपिशाचानां पठनादेव नाशनम्।।”