Guru Nanak Jayanti 2019 पर लोग गुरु नानक देव जी का जन्‍मदिन मनाते हैं. इसे प्रकाश पर्व के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन लोग गुरु नानक देव जी की सीखों को याद करते हैं और उन पर चलने का संकल्‍प लेते हैं.

इस बार गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती है. इस खास मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़े ऐसे 10 तथ्‍य, जिनसे शायद आप वाकिफ नहीं होंगे.

Guru Nanak से जुड़ी 10 खास बातें

1. गुरु नानक (Guru Nanak) देव जी का जन्‍म (Guru Nanak Birthday) संवत्‌ 1526 में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन हुआ था. नानक जी का जन्म रावी नदी के किनार स्थित तलवंडी नामक गांव खत्रीकुल में हुआ था. आगे चलकर तलवंडी का नाम, नानक के नाम पर ननकाना पड़ा.

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2. गुरु नानक जी के पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था. बहन का नाम नानकी था.

3. गुरु नानक के बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी थीं. इन्‍हें देखकर गांव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे थे.

4. Guru Nanak बचपन से सांसारिक विषयों से उदासीन रहते थे. सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में बिताते थे.

5. वे धर्म प्रचारकों को उनकी खामियां बताते थे. लोगों से धर्मांधता से दूर रहने का आग्रह करते थे.

6. गुरु नानक जी का विवाह 1487 में माता सुलखनी से हुआ. उनके दो पुत्र हुए. जिनका नाम श्रीचन्द और लक्ष्मीचन्द था.

7. गुरु नानक कहते थे, ईश्वर एक है उसकी उपासना हिंदू-मुसलमान दोनों के लिए हैं. मूर्तिपुजा, बहुदेवोपासना को वे अनावश्यक बतो थे.

8. ऐसा कहा जाता है कि नानकदेव जी को उनके पिता ने व्यापार करने के लिए 20 रुपये दिए और कहा- इन 20 रुपये से सच्चा सौदा करके आओ. नानक देव जी सौदा करने निकले. रास्ते में उन्हें साधु-संतों की मंडली मिली. नानकदेव जी साधु-संतों को 20 रुपये का भोजन करवा वापस लौट आए. पिताजी ने पूछा- क्या सौदा करके आए? उन्होंने कहा- ‘साधुओं को भोजन करवाया. यही तो सच्चा सौदा है.

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9. वे कहते थे, ईश्वर मनुष्य के हृदय में बसता है. अगर हृदय में नफरत, निंदा, क्रोध है तो ऐसे मैले हृदय में परमात्मा नहीं बैठते.

10. वे अपने जीवन के अंतिम चरण में करतारपुर बस गए. 25 सितंबर 1539 को शरीर त्यागा. मृत्यु से पहले उन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, जो बाद में गुरु अंगद देव के नाम से जाने गए.

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