Guru Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत के साथ होगी नए साल 2026 की शुरुआत, बन रहा है बेहद ही दुर्लभ संयोग

Guru Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और भोलेनाथ के आशीर्वाद से जातकों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. नए साल 2026 की शुरुआत प्रदोष व्रत से होगी.

Published date india.com Published: December 17, 2025 5:29 PM IST
Guru Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत के साथ होगी नए साल 2026 की शुरुआत, बन रहा है बेहद ही दुर्लभ संयोग

Guru Pradosh Vrat 2026: न्यूमरोलॉजी के मुताबिक यह साल सूर्य का होगा और सूर्य के प्रभाव से कई लोगों की तरक्की रास्ते खुलेंगे. साथ ही लंबे समय रूके हुए काम पूरे होंगे. वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से नया साल 2026 बहुत ही खास और शुभ होने वाला है. क्योंकि नए साल के पहले ही दिन प्रदोष व्रत पड़ रहा है और इस दिन गुरुवार भी है. प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. ऐसे में साल की शुरुआत भगवान शिव और भगवान विष्णु के आशीर्वाद से होगी.

बन रहा है दुर्लभ संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 1 जनवरी 2026, गुरुवार को है और इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा. जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है उसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं और इस दिन भोलेनाथ की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. कहते हैं कि प्रदोष काल में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और उनसे य​दि कुछ मांगा जाए तो वह भक्तों को निराश नहीं करते. 1 जनवरी 2026 को प्रदोष व्रत के दिन भगवान गुरुवार पड़ रहा है और इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु का पूजन किया जाएगा. नए साल के पहले दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी और ऐसे संयोग बहुत ही कम बनते हैं.

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गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत को बहुत ही फलदायी माना गया है और इस दिन यदि विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन किया जाए तो जीवन में आ रहे सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है. गुरु प्रदोष के दिन शिव जी और विष्णु जी का पूजन करने से जातकों को सभी रोगों से मुक्ति मिलेगी. कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होगा और सौभाग्य बढ़ेगा. साथ ही गुरु प्रदोष व्रत ज्ञान बढ़ाता है और मनोकामनाएं भी पूरी करता है.

गुरु प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

1 जनवरी 2026 को गुरु प्रदोष व्रत के साथ नए साल की शुरुआत होगी और इस दिन पीले कपड़े पहनना शुभ होगा. नए साल के पहले दिन सुबह भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजन करें और उन्हें पीले फूल व पीले रंग की मीठाई का भोग लगाएं. ऐसा करने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं. फिर शाम के समय यानि प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन किया जाता है. बता दें कि सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष काल कहते हैं. पंचांग के अनुसार प्रदोत व्रत की पूजा का समय शाम 5 बजकर 35 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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