Guru Purnima 2018: गुरु पूर्णिमा को लोग व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. क्योंकि महाभारत की रचना करने वाले वेद व्यास का जन्म इसी दिन हुआ था. यह भी माना जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध ने उत्तर प्रदेश में सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था. गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस साल गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को है.

गुरु का अर्थ :

‘गुरु’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘गू’ और ‘रू’ से बना है. ‘गू’ का अर्थ होता है अंधेरा या अज्ञानता और ‘रू’ का तात्पर्य है ‘निवारण’. यानी गुरु का अर्थ हुआ एक ऐसा व्यक्ति जो अज्ञानता रूपी अंधकार को जीवन से मिटा दे. गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं और उनका आर्शीवाद लेते हैं. भारत में इस पर्व का खास महत्व है. भारत के अलावा पड़ोसी देश नेपाल में भी इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. नेपाल में गुरु पूर्णिमा के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है और इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.

यह भी पढ़ें: गुरु पूर्णिमा 2018: ये हैं वे गुरु-शिष्य, जिनके किस्से हमें देते हैं प्रेरणा

भगवान शंकर से जुड़ा:

यौगिक परंपरा में भगवान शंकर को इस ब्रह्मांड का पहला गुरु माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर ने सप्तऋषि को योग सिखाया था.

महत्व:

आज के दिन ऋषि पराशारा और सत्यवती के घर महाभारत के रचयिता कृष्णा-द्विपयण व्यास का जन्म हुआ था. इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. ऋषि व्यास सभी वैदिक स्तोत्र को इकट्ठा कर वैदिक अध्ययन करते थे और बाद में उन्हें संस्कार व अभिलक्षण के आधार पर चार हिस्सों में बांट दिया. इसे ही ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का नाम दिया गया.

यह भी पढ़ें: जुलाई से अगस्त महीने में आने वाले हैं ये त्योहार, जानिये

तिथि:

पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी : 26 जुलाई, 2018 को रात 11:16 pm बजे पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी.
पूर्णिमा तिथि कब समाप्त होगी : 28 जुलाई 2018 को सुबह 1:50 am बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी.

सावन और धर्म से जुड़ी अन्य खबरों को पढ़ने के लिए धर्म पर क्लिक करें.