Guru purnima 2018: आषाढ़ महीने में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. महाभारत के रचयिता और ऋषि पराशारा और सत्यवती के पुत्र महर्षि वेद व्यास का जन्म आज ही के दिन हुआ था. इसलिए यह दिन उन्हें समर्पित है. इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को मनाया जाएगा. 27 जुलाई को ही चंद्रग्रहण भी लग रहा है. ऐसे में यह जानना और भी अनिवार्य हो जाता है कि गुरु की पूजा का समय क्या होगा. Also Read - Guru Purnima 2019: गुरु पूर्णिमा पर महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन का महत्‍व...

पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी : 26 जुलाई, 2018 को रात 11:16 pm बजे पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी. Also Read - Lunar Eclpise 2018: 3.49 पर समाप्त होगा चंद्रग्रहण, सुबह उठकर सबसे पहले करें ये 7 काम

पूर्णिमा तिथि कब समाप्त होगी : 28 जुलाई 2018 को सुबह 1:50 am बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी. Also Read - लग गया सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण, Lunar Eclipse के बारे में जानिए सबकुछ

गुरु पूजन का शुभ मुहूर्त:

27 जुलाई को चंद्रग्रहण भले ही रात में लग रहा है, लेकिन इसका सूतक दोपहर 2.54 बजे ही लग जाएगा. यानी आपको गुरु पूजन इससे पहले ही करना होगा.

इसके अलावा 27 जुलाई को सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक राहुकाल है. राहुकाल के दौरान भी गुरु पूजन नहीं होगा. ऐसे में आप अपने गुरु की पूजा सुबह 5 बजे से लेकर सुबह 10:29 बजे तक और दोपहर 12:01 मिनट से 2:53 बजे तक कर सकते हैं.

Guru Purnima 2018: जानिये क्या है इसका महत्व

गुरु पूजन विधि

गुरु को भगवान का स्थान प्राप्त है. गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शंकर हैं. गुरु ही ब्रह्मांड हैं. गुरु के पूजन की विधि भी भगवान के पूजन विधि जैसी ही है.

1. गुरु पूर्णिमा के दिन सुुुुबह-सुबह उठकर घर की साफ सफाई कर लें और फिर स्नान कर साफ कपड़े पहनें.

2. घर के मंदिर में पटिए पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं.

3. ऐसा करने के बाद दोनों हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें – ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’

4. दसों दिशाओं में अक्षत (चावल) छोड़ें.

5. व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम से पूजा का आवाहन करें.

6. अंत में अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा प्रदान करें.

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यदि आपने किसी को अपना गुरु माना है तो आज उनकी पूूूूजा भी जरूर करें. इस प्रकार करें पूजन:-

– सबसे पहले गुरु के चरणों को धोएं.
– फूल, तिलक, आरती और मिष्ठान से उनकी पूजा करें.
– उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें और उनके पैर छुएं.
– गुरु का आर्शीवाद लें और गुरु को भोजन कराएं.

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आज के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा:

गुरु पूर्णमा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का विधान है. बंगाल में इस दिन साधु सिर मुंडाकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं. ब्रज में इसे मुड़िया पूनों नाम से भी जाना जाता है.

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