Guru Purnima 2019: गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई, मंगलवार को है. इस दिन गुरु की पूजा का विधान है. Also Read - चंद्र ग्रहण के बाद आज राशि अनुसार इन चीजों का करें दान, दूर होंगे सभी कष्‍ट

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– गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर घर की साफ सफाई करें. फिर स्नान कर साफ कपड़े पहनें. Also Read - Lunar Eclipse 2019: 16-17 जुलाई की रात साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, इस समय से होगा शुरू...

– घर के मंदिर में पटिए पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं.

– ऐसा करने के बाद दोनों हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें-
गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये

– दसों दिशाओं में अक्षत (चावल) छोड़ें.

– व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम से पूजा का आह्वान करें.

– गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा प्रदान करें.

यदि आपने किसी को गुरु माना है तो उनकी पूजा जरूर करें –

– गुरु के चरणों को धोएं.
– फूल, तिलक, आरती और मिष्ठान से उनकी पूजा करें.
– उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें और उनके पैर छुएं.
– गुरु का आर्शीवाद लें और गुरु को भोजन कराएं.

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01:48 बजे (16 जुलाई 2019) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 03:07 बजे (17 जुलाई 2019) तक

क्‍यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा
इस दिन ऋषि पराशार और सत्यवती के घर महाभारत के रचयिता कृष्णा-द्विपयण व्यास का जन्म हुआ था. इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. ऋषि व्यास सभी वैदिक स्तोत्र को इकट्ठा कर वैदिक अध्ययन करते थे और बाद में उन्हें संस्कार व अभिलक्षण के आधार पर चार हिस्सों में बांट दिया. इसे ही ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का नाम दिया गया.

परंपरागत तौर पर बुद्ध को मानने वाले इस पर्व को भगवान बुद्ध की याद में मनाते हैं. माना जाता है कि वाराणसी के सारनाथ में उन्होंने अपने शिष्यों को पहला उपदेश दिया था.

वहीं, भगवान शिव को दुनिया का पहला गुरु माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर ने सप्तऋषि को योग सिखाया था.