दिल्ली: सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव हैं. 15 अप्रैल 1469 को रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक स्थान पर जन्में गुरु नानक साहिब का जन्मदिन हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन पड़ता है. इस साल गुरुनानक की 549वीं जयंती मनाई जा रही है. भारतीय संस्कृति में गुरु का विशेष महत्व है और गुरु नानक तो ऐसे गुरु हैं जो न केवल सिखों में, बल्कि अन्य धर्मो के लोगों में भी उतने ही आदरणीय हैं. Also Read - Kartik Purnima 2018: गंगा-गंडक संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

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गुरु नानक देव के चमत्कारों से जुड़े कई किस्से हैं जिनमें से एक किस्सा इस प्रकार है. एक बार भागो मलिक नाम के एक अमीर सेठ ने गुरु नानक को अपने घर पर भोजन के लिए निमंत्रण दिया, लेकिन नानक जानते थे कि वो गरीबों पर बहुत अत्याचार करता है, इसीलिए उन्होंने भागो सेठ का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया यही नहीं उसी समय उन्होंने एक गरीब मजदूर जिसके पास सिवाय बासी रोटी के कुछ नहीं था, उसके निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार कर लिया.

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भागो सेठ ने इसे अपना अपमान समझा और उसने गुरु नानक को खूब खरी-खोटी सुनाई, अपमानजनक शब्द कहे, लेकिन नानक ने इसका बुरा न मानते हुए उससे कहा, “तेरी कमाई पाप की कमाई है, जबकि इस मजदूर की कमाई वास्तव में मेहनत की कमाई है.” यह सुनते ही भागो सेठ भड़क उठा और गुस्से में भरकर कहने लगा, ‘वास्तव में तुम अव्वल दर्जे के पाखंडी हो और नीच कुल के हो, तभी तो नीच कुल वालों का ही निमंत्रण स्वीकार करते हो.’ गुरु नानक ने कहा, ‘भागो, मैं वह भोजन कदापि ग्रहण नहीं कर सकता, जो गरीबों का खून चूसकर तैयार किया गया हो’.

भागो ने गुस्से में भर पूछा, ‘मेरे स्वादिष्ट व्यंजनों से तुम्हें खून निकलता दिखाई देता है और उस मजदूर की बासी रोटियों से दूध’ क्या तुम इसे साबित कर सकते हो ? इस पर गुरु नानक ने कहा, अगर तुम्हें विश्वास न हो तो स्वयं आजमाकर देख लो. नानक की बात से क्रोधित भागो सेठ ने फौरन अपने घर से स्वादिष्ट व्यंजन मंगवाए और नानक ने उस मजदूर के घर से बासी रोटी. तब नानक ने एक हाथ में भागो के स्वादिष्ट व्यंजन लिए और दूसरे में मजदूर के घर की बासी रोटी और दोनों हाथों को एक साथ दबाया. यह नजारा देख रहे वहां मौजूद लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ गई, जब उन्होंने देखा कि मजदूर की बासी रोटी में से सचमुच दूध की धार निकल रही है, जबकि भागो के स्वादिष्ट व्यंजनों में से खून की धार. यह देख भागो सेठ का अहंकार चूर-चूर हो गया और वह उसी क्षण गुरु नानक के चरणों में गिर पड़ा गया और उनसे क्षमा याचना करने लगा.

Guru Nanak

गुरु नानक जी के दस सिद्धांत-

1.ईश्वर एक है.

2.सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करें.

3.ईश्वर की भक्ति करने वाले सभी भयों से मुक्त हो जाते हैं.

4.ईश्वर सब जगह मौजूद है. उसकी नजर से कुछ भी छिपा नहीं है.

5.बुरा काम करने के बारे में ना सोचे और ना कभी किसी को सताए.

6.हमेशा खुश रहना चाहिए. ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता और धैर्य मांगना चाहिए.

7 .मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद की भी मदद करनी चाहिए.

8.सभी लोग एक सामान हैं न कोई छोटा न कोई बड़ा.

9.लोभ और लालच नहीं करना चाहिए.

10.ईमानदारी से जीवन यापन करना चाहिए.

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