नई दिल्ली. भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षा बंधन आगामी रविवार यानी 26 अगस्त को मनाया जाएगा. हमारे देश में राखी के इस पावन दिन से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिससे इस अनूठे त्योहार की विशेषता का पता चलता है. इस त्योहार के प्रारंभ होने के पीछे कई जानकार हिन्दू धर्म की पौराणिक कहानियों का हवाला देते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे इतिहास और ऐतिहासिक पात्रों से जोड़कर देखते हैं. इसलिए रक्षा बंधन को लेकर एक तरफ जहां महाभारत काल में कृष्ण-द्रौपदी के भाई-बहन समान प्रसंग की चर्चा की जाती है, वहीं रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं के बीच राखी बांधने का जिक्र भी किया जाता है. इस रक्षा बंधन के मौके पर आइए पढ़ते हैं कुछ ऐसी ही कहानियां जो भाई-बहन के अटूट प्रेम का पावन त्योहार है. Also Read - रक्षा बंधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने की घोषणा, राज्य में खुलेंगे 11 कॉलेज

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राखी या रक्षा बंधन या रक्षा सूत्र बांधने की सबसे पहली चर्चा महाभारत में आती है, जहां भगवान कृष्ण को द्रौपदी द्वारा राखी बांधने की कहानी है. दरअसल, भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से चेदि नरेश शिशुपाल का वध कर दिया था. इस कारण उनकी अंगुली कट गई और उससे खून बहने लगा. यह देखकर विचलित हुई रानी द्रौपदी ने अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की कटी अंगुली पर बांध दी. कृष्ण ने इस पर द्रौपदी से वादा किया कि वे भी मुश्किल वक्त में द्रौपदी के काम आएंगे. पौराणिक विद्वान, भगवान कृष्ण और द्रौपदी के बीच घटित इसी प्रसंग से रक्षा बंधन के त्योहार की शुरुआत मानते हैं. कहा जाता है कि कुरुसभा में जब द्रौपदी का चीरहरण किया जा रहा था, उस समय कृष्ण ने अपना वादा निभाया और द्रौपदी की लाज बचाने में मदद की.

यम-यमुना

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राखी के त्योहार की शुरुआत मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना के बीच रक्षा बंधन से भी मानी जाती है. यमुना ने अपने भाई यम को राखी बांधी थी. यम ने इस पर यमुना को अमरत्व का वरदान दिया. किंवदंती है कि मृत्यु के देवता यम ने इस त्योहार को लेकर वरदान दिया था कि जो भाई रक्षा बंधन के अवसर पर बहन से राखी बंधवाता है और उसकी आजीवन सुरक्षा का वचन देता है, तो उसे अमरत्व की प्राप्ति होगी.

कर्णावती-हुमायूं

मेवाड़ के महाराजा राणा सांगा की मृत्यु के बाद बहादुर शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया था. इससे चिंतित रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को एक चिट्टी भेजी. इस चिट्ठी के साथ कर्णावती ने हुमायूं को भाई मानते हुए एक राखी भी भेजी और उनसे सहायता मांगी. हालांकि मुगल बादशाह हुमायूं बहन कर्णावती की रक्षा के लिए समय पर नहीं पहुंच पाया, लेकिन उसने कर्णावती के बेटे विक्रमजीत को मेवाड़ की रियासत लौटाने में मदद की.

रुक्साना-पोरस

रक्षा बंधन को लेकर इतिहास में राजा पुरु (पोरस) और सिकंदर की पत्नी रुक्साना के बीच राखी भेजने की एक कहानी भी खूब प्रसिद्ध है. दरअसल, यूनान का बादशाह सिकंदर जब अपने विश्व विजय अभियान के तहत भारत पहुंचा तो उसकी पत्नी रुक्साना ने राजा पोरस को एक पवित्र धागे के साथ संदेश भेजा. इस संदेश में रुक्साना ने पोरस से निवेदन किया कि वह युद्ध में सिकंदर को जान की हानि न पहुंचाए. कहा जाता है कि राजा पोरस ने जंग के मैदान में इसका मान रखा और युद्ध के दौरान जब एक बार सिकंदर पर उसका धावा मजबूत हुआ तो उसने यूनानी बादशाह की जान बख्श दी. इतिहासकार रुक्साना और पोरस के बीच धागा भेजने की घटना से भी राखी के त्योहार की शुरुआत मानते हैं.

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लक्ष्मी-बलि

देवी लक्ष्मी और राजा बलि के बीच राखी बांधने को लेकर भी एक कथा प्रचलित है. इसके अनुसार देवी लक्ष्मी ने एक बार खुद को आश्रयहीन महिला बताते हुए राजा बलि के महल में शरण मांगी. बलि ने देवी को सहर्ष अपने महल में ठहरने को कहा. सावन पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर एक सूती धागा बांधते हुए उनसे रक्षा करने की मांग की. जब राजा बलि ने इसका तात्पर्य पूछते हुए उनसे वरदान मांगने को कहा तो देवी लक्ष्मी ने द्वारपाल की तरफ इशारा किया. द्वारपाल दरअसल विष्णु थे, जो राजा बलि की सुरक्षा में तैनात थे. देवी लक्ष्मी की रक्षा का वचन दे चुके राजा बालि ने इस पर विष्णु से कहा कि वह लक्ष्मी के साथ अपने निवास पर लौट जाएं. भगवान विष्णु ने भी इसके बाद राजा बलि को आश्वासन दिया कि वे साल के 4 महीने उनके साथ रहेंगे.

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