Haridwar Kumbh Mela 2021: हरिद्वार कुंभ में कल्पवास का आरंभ हो गया है. इसी के साथ ही स्नान करने वालों की भीड़ मेले में पहुंच रही है. अगर आप भी कुंभ जा रहे हैं तो पहले जान लें इस बार के क्या हैं नए नियम. Also Read - Kumbh Mela 2021 Guidelines: कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को लानी होगी नेगेटिव कोविड रिपोर्ट, सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से इसको लेकर एसओपी जारी की गई है. एसओपी के मुताबिक,  कुंभ मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के RTPCR टेस्ट अनिवार्य होंगे और उन्हें 72 घंटे पहले की नेगेटिव रिपोर्ट लानी होगी. यही नहीं, कुंभ में भी 6 फीट की दूरी और मास्क जरूरी होगा. Also Read - Haridwar Mahakumbh Mela 2021 Shahi Snan Date: महाकुंभ के लिए तैयार हुआ हरिद्वार, यहां जानें शाही स्नान की सभी डेट्स

गौरतलब है कि मेले में इस बार 6 प्रमुख स्नान हैं. ये हैं- 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा , 11 मार्च महाशिवरात्रि , 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या , 14 अप्रैल बैसाखी , 21 अप्रैल को राम नवमी और 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा. Also Read - Haridwar Kumbh Mela 2021 Importance: जानें हरिद्वार में होने वाला कुंभ क्यों है खास

कल्पवास का आरंभ
श्रद्धालु संगम की रेती पर करीब माह भर तक साधनारत होकर कल्पवास करेंगे. कल्पवासी घर-गृहस्थी का मोह छोड़कर संगम तट पर आते हैं.

पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास की पूर्ण व्यवस्था का वर्णन किया है. उनके अनुसार कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए.

ये नियम हैं –सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, यथा-शक्ति दान, अन्तर्मुखी जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना. जिनमें से ब्रह्मचर्य, व्रत एवं उपवास, देव पूजन, सत्संग, दान का विशेष महत्व है.

इस साल भी ऐसा ही हुआ है. कोरोना संक्रमण का भय, भीषण ठंड भी उनकी आस्था नहीं डिगा पाए हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में डुबकी लगा रहे हैं.