सोलह श्रृंगार कर भगवान शंकर और मां पार्वती की पूजन और अपने पत‍ि की लंबी आयु की कामना करने का त्‍योहार है हर‍ियाली तीज. देश के कुछ राज्‍यों में व‍िवाह‍ित स्‍त्र‍ियां यह त्‍योहार अपने मायके में मनाती हैं. खासतौर से शादी के बाद आया पहला सावन मायके में ही गुजरता है. हर‍ियाली तीज के द‍िन ससुराल से बहू के लि‍ए 16 श्रृंगार की समाग्री और अन्‍य उपहार आते हैं.

यह त्‍योहार जहां एक ओर पत‍ि से प्रेम को और गाढ़ा करता है, वहीं दो पर‍िवारों के बीच मजबूत र‍िश्‍ते की बुन‍ियाद को और मजबूत करता है. आप यह व्रत रखते हों या नहीं, पर इस अनोखे और सुखद त्‍योहार के बारे में कुछ बाते आपको जरूर मालूम होनी चाह‍िए.

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1- हर‍ियाली तीज क्‍यों मनाई जाती है:

हर‍ियाली तीज को लेकर आपके मन में यह सवाल तो जरूर आता होगा क‍ि इसे आख‍िर क्‍यों मनाया जाता है. दरअसल, ऐसी मान्‍यता है क‍ि कठोर तपस्‍या के बाद इसी द‍िन मां पार्वती का व‍िवाह भगवान शंकर से हुुआ था. मां पार्वती की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शंकर ने आज ही के द‍िन यानी श्रावण मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को ही मां पार्वती के सामने प्रकट हुए और उनसे व‍िवाह क‍िया.

2- पत‍ि और पुत्र दोनों के ल‍िए व्रत:

इस तथ्‍य को संभवत: कम ही लोग जानते हैं क‍ि हर‍ियाली तीज का व्रत पत‍ि और संतान दोनों के ल‍िए रखा जाता है. कुंवारी कन्‍याएं, जहां अच्‍छे वर के ल‍िए यह व्रत रखती हैं, वहीं व‍िवाह‍ित मह‍िलाएं संतान और पत‍ि की लंबी आयु के ल‍िए यह व्रत रखती हैं. ज‍िन मह‍िलाओं को संतान सुख प्राप्‍त नहीं है, वह संतान की कामना करने के ल‍िए यह व्रत रखती हैं.

3- म‍िट्टी और रेत की मूर्त‍ि:

हर‍ियाली तीज के द‍िन व‍िवाह‍ित औरतें पूजन के लि‍ए म‍िट्टी और रेत की भगवान शंकर व मां पार्वती की मूर्त‍ि बनाती हैं और उनकी पूजा करती हैं. इसके बाद इसे नदी में व‍िसर्ज‍ित कर देती हैं.

4- व‍िध‍िवत पूजन जरूरी:

हर‍ियाली तीज के द‍िन भगवान शंकर और मां पार्वती की सुबह-सुबह व‍िध‍िवत पूजा की जाती है. इसके बाद ही व्रत शुरू माना जाता है.

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5- सफेद और काला वस्‍त्र वर्ज‍ित:

हर‍ियाली तीज के द‍िन सफेद और काला वस्‍त्र पहननाा वर्ज‍ित होता है. इसे अशुभ माना जाता है.

6- श‍िव-पार्वती कथा:

हर‍ियाली तीज का व्रत श‍िव-पार्वती के व‍िवाह कथा के बगैर अधूरा माना जाता है. इसलि‍ए अगर आपने हर‍ियाली तीज का व्रत रखा है तो आप भी कथा जरूर सुनें.

7- श्रृंगार का महत्‍व

हर‍ियाली तीज के द‍िन श्रृंगार का खास महत्‍व है. वैसे तो तीज के द‍िन 16 श्रृंगार का व‍िधान है, लेकि‍न व‍िवाह‍ित स्‍त्र‍ियों के ल‍िए तीन महत्‍वपूर्ण श्रृंगार जरूरी है. मेहंदी, चूड़ी और लहर‍िया साड़ी.

8- दूसरों की बुराई ना करें:

हर‍ियाली तीज के द‍िन दूसरों की बुराई ना करें. खासकर क‍िसी के आचरण को लेकर गलत अफवाहें ना फैलाएं. इसका व्रत पर नकारात्‍मक असर होता है. इसके साथ ही पति से छल कपट, झूठ और दुर्व्यवहार नहीं करनी चाहिए.

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9- हर‍ियाली तीज का व्रत:

हर‍ियाली तीज का व्रत 24 घंटे का होता है. अगले द‍िन इसका पारण होता है.

10- हरियाली तीज की पूजा सामग्री:

हर‍ियाली तीज की पूजा में ज‍िन चीजों की आवश्‍यकता होती है, उसमें गीली मिट्टी, पीले रंग का नया कपड़ा, बेल पत्र, कलावा, धूप-अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, फूल-फल, नारियल और पंचामृत आदि प्रमुख हैं.

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