Hartalika Teej का व्रत पति की लंबी उम्र की कामना से किया जाता है. इस मौके पर महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं. भगवान शिव-मां पार्वती की पूजा करती हैं.

पर ये पूजन तभी सफल माना जाता है जब इस व्रत में कुछ खास नियमों का पालन किया जाए. ये नियम ऐसे हैं जिन्‍हें सालों से महिलाएं मानती आई हैं. ये परंपरा का हिस्‍सा बन गए हैं.

आप भी जानें इन्‍हें-

– एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखना शुरू कर दिया तो आपको ये हर साल करना होगा. जब तक पति जीवित है तब तक इस व्रत को करना अनिवार्य हो जाता है.

– बिना अन्न और जल ग्रहण किए इस व्रत को रखा जाता है. पूरे दिन महिलाएं पानी तक नहीं पीती. अगले दिन सूर्योदय के पश्‍चात ही इस व्रत का पारण होता है.

– इसे विवाहित महिलाएं और अविवाहित युवतियां, दोनों रख सकती हैं.

– इस व्रत को रखने वाली महिला, मां पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करती हैं.

– पूजा के दौरान मां पार्वती को सुहाग की सभी सामग्रियां अर्पित की जाती हैं.

– भगवान शिव को भी वस्त्र अर्पित करने की परंपरा है, वस्त्र में धोती या फिर अंगौछा चढ़ाया जाता है. चाहे तो दोनों भी चढ़ा सकते हैं.

– पूजा के बाद सुहाग की समाग्री किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर के पुरोहित को दान की जाती है. दान से पहले सास के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है.

हरतालिका तिथि
यह व्रत भादो माह की शुक्‍ल पक्ष तृतीया यानी गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले रखा जाता है. पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है. 1 सितंबर सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि होगी, जो 08:27 बजे पर खत्‍म हो जाएगी. इसके बाद तृतीया लग जाएगी. असमंजस इस बात का है कि जब तृतीया तिथि को सूर्य उदय ही नहीं हुआ तो व्रत किस आधार पर रखा जाए.