Hartalika Teej का व्रत सुहाग की लंबी उम्र की कामना से किया जाता है. इस‍ दिन भगवान शिव-मां पार्वती की पूजा की जाती है.

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. 16 श्रृंगार करती हैं. शाम के समय व्रत कथा कहती हैं और पूजन करती हैं. रात को चंद्रमा को अर्घ्‍य दिया जाता है.

महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई राज्यों में इसे हरतालिका तीज के नाम से जानते हैं और दक्षिण भारतीय राज्यों में इसे गौरी हब्बा के नाम से जानते हैं. इस व्रत को विवाहित और अविवाहित लड़कियां कर सकती हैं. विवाहित महिलाएं जहां अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छा और मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए व्रत रखती हैं.

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Hartalika Teej 2019
हरतालिका तीज का व्रत इस बार 1 सितंबर, रविवार को है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रातःकाल मुहूर्त: 05:58 बजे से 08:31 बजे तक.
प्रदोष काल मुहूर्त: 6:43 बजे से 8:58 बजे तक.

हरतालिका तीज का महत्व
ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को पहली बार मां पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए किया था. मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अन्न और जल सभी का त्याग कर दिया था. उनके पिता की इच्छा थी कि पार्वती भगवान विष्णु से शादी कर लें. लेकिन मां पार्वती के मन मंदिर में भगवान शिव बस चुके थे और इसलिए उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और कठोर तपस्या शुरू कर दी.

इस दौरान मां पार्वती ना तो कोई अन्न ग्रहण किया और ना ही जल ही ग्रहण किया. इसलिए यह माना जाता है कि इस व्रत में अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिए. मां पार्वती की कठोर तपस्या को देखकर भगवान शंकर उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.