होली, रंगों और उत्‍साह का पर्व है. होली पर लोग रंग खेलते हैं, गुझिया खाते हैं, एक-दूसरे को बधाई देते हैं.

पर क्‍या आप जानते हैं कि होली का पर्व आखिर मनाया क्‍यों जाता है. वो वजह क्‍या है जिससे होली सालों से जनपर्व बना हुआ है.

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होली की कहानी
प्राचीन काल में एक असुर राजा था जिसका नाम हिरण्यकश्यप था. उसने कई वर्षों तक कठिन तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान पा लिया कि संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे न मार सके. न वह रात में मरे, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न घर से बाहर. यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसे न मार पाए.

ऐसा वरदान पाकर वह अत्यंत निरंकुश बन बैठा और सभी से जबरन अपनी पूजा करवाने के लिए अत्याचार करने लगा. हिरण्यकश्यप को कुछ समय बाद पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम उसने प्रह्लाद रखा. प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि थी.

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की पूजा न करे. प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप ने उसे जान से मारने का हर संभव प्रयास किया. उसे पहाड़ी से फेंका, विषैले सांपों के साथ छोड़ दिया लेकिन प्रभु-कृपा से वह हर बार बचता रहा.

इसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई. होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था. उसको वरदान में एक ऐसी चादर मिली हुई थी जिसे ओढ़कर वह आग में नहीं जल सकती थी.

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होलिका प्रह्लाद को गोद में उठा जलाकर मारने के उद्देश्य से वरदान वाली चादर ओढ़ धूं-धू करती आग में जा बैठी. तभी भगवान की कृपा से बहुत तेज आंधी चली और वह चादर उड़कर बालक प्रह्लाद पर आ गई और होलिका जल कर वहीं भस्म हो गई.

इस प्रकार प्रह्लाद एक बार फिर बच गए. इसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और खंभे से निकल कर गोधूली समय (सुबह और शाम के समय का संधिकाल) में दरवाजे की चौखट पर बैठकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप को अपने नाखूनों से मार डाला. तभी से बुराई पर अच्छाई की विजय के लिए होली का त्योहार मनाया जाने लगा.

Holi 2019
इस साल यह पर्व 21 मार्च 2019, गुरुवार को मनाया जाएगा. यानी 20 मार्च को होलाष्टक खत्‍म होने के साथ होलिका दहन होगा और 21 मार्च को रंगों के साथ त्योहार मनाया जाएगा. होलिका दहन को लोग छोटी होली भी कहते हैं.

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