मथुरा: ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध स्थल बरसाना में शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध लठामार होली खेली गई, जिसमें महिलाओं ने पुरुषों पर लाठियां बरसायी और पुरुषों ने हंसते हुए ढाल से अपना बचाव किया. इन अनूठी होली को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग बरसाने में आए हुए थे.

बरसाना की हुरियारिनों (लाठी चलाने वाली महिलाएं) से होली खेलने नन्दगांव से आए हुरियारों (ढाल लेकर होली खेलने वाले पुरुष) पर लाठियां बरयायीं. यह पुरानी परम्परा है जिसे हर वर्ष फाल्गुन मास की नवमीं के दिन मनाया जाता है.

शनिवार यानी आज भी एक बार फिर कुछ इसी प्रकार की होली होगी, लेकिन उसका स्थान बरसाना के बजाय नन्दगांव होगा. नन्दगांव में होली खेलने बरसाना के हुरियारे जायेंगे और हुरियारिनें स्थानीय महिलाएं होंगी.

ये है पंरपरा
इस होली को भगवान कृष्ण के समय से मनाया जा रहा है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलने पहुंच जाते थे और उनके बीच खूब हंसी-ठिठोली होती थी. इस दौरान राधा और उनकी सखियां ग्वाल बालों पर डंडे बरसाया करती थीं.

ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गई. मथुरा-व़ंदावन, नंदगांव और बरसाने में आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है और लट्ठमार होली मनायी जाती है.

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.