Holi 2020 Holashtak: होली से एक सप्‍ताह पहले का समय होलाष्‍टक कहलाता है. इन दिनों में शुभ कार्य करने की मनाही होती है. Also Read - नताशा ने हार्दिक पांड्या संग ससुराल में जमकर खेली होली,भज्‍जी-धवन भी होली के रंग में आए नजर

होलाष्‍टक का अर्थ

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होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है. इसका अर्थ होता है होली से पहले के आठ दिन. इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती है.Holi 2020 Also Read - Happy Holi 2020 Wishes In Hindi: होली पर हिंदी में भेजें ये शुभकामना संदेश, दें रंगपर्व की बधाई

Holashtak Date

 

इस साल 3 मार्च, मंगलवार से होलाष्टक शुरू हो रहे हैं जो होली तक चलेंगे. इन दिनों में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. होलाष्टक आठ दिन तक का होता है पर इस बार सात दिन के हैं. पंडितों के अनुसार, ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार होलाष्टक के दौरान त्रयोदशी तिथि का क्षय हो रहा है. इस बार 9 मार्च को होली और 10 मार्च को दुल्हैंडी यानी रंग का त्योहार है.

होलाष्‍टक की अशुभता

 

ज्‍योतिष के अनुसार, होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं. इसलिए इस दौरान जो शुभ कार्य किए जाते हैं उनका उत्‍तम फल प्राप्‍त नहीं होता. कहा जाता है कि होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में होते हैं.

होलाष्‍टक में क्‍या करें क्‍या नहीं

 

होलाष्‍टक के समय को शुभ समय नहीं माना जाता. इसलिए इस बीच कोई शुभ एवं मंगल कार्य, नवीन कार्य नहीं किए जाते हैं. विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण, नामकरण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं. नए काम भी शुरू नहीं होती. शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में व्रत, पूजन व दान का विशेष महत्‍व है. इन दिनों में किए गए व्रत और दान से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. ईश्वर आशीर्वाद देते हैं. इसलिए इन दिनों में वस्त्र, अनाज आदि दान करने चाहिए.

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