Holi In Gorakhpur: हजारों लोग, आसमान से रंगों की बारिश, हवा में उड़ता गुलाल. पूरी की पूरी सड़क पर बिखरे कई तरह के रंग. रथ पर सवार गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. रथ के आगे-पीछे रंग में सराबोर हजारों लोग. यह दृश्‍य खुद में अनूठा है. कुल मिलाकर यहां की होली का उल्लास और उमंग बरसाने जैसा ही होता है. Also Read - योगी आदित्यनाथ का बयान- यूपी में कुल 308 कोरोना संक्रमितों में जमाती सबसे ज्यादा

गोरखपुर की इस होली का नाम है भगवान नरसिंह की रंगभरी शोभायात्रा. रथ पर सवार होकर इसकी अगुआई गोरक्षपीठाधीश्वर करते हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को निभाते हैं. रथ को लोग खींचते हैं और रथ के आगे-पीछे हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं. जिस रास्ते से रथ गुजरता है, छत से महिलाएं और बच्चे इस शोभायात्रा पर रंग-गुलाल फेंकती हैं. बदले में इधर से भी उन पर रंग-गुलाल फेंका जाता है. Also Read - यूपी में भी आगे बढ़ सकता है लॉकडाउन, सीएम योगी के साथ मीटिंग के बाद अधिकारी ने दिए संकेत

अनूठी होली की यह परंपरा करीब सात दशक पहले नानाजी देशमुख ने डाली थी. बाद में नरसिंह शोभायात्रा की अगुवाई गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर करने लगे. Also Read - Covid-19: गृह मंत्री अमित शाह से लेकर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ तक, इन राज नेताओं ने जलाए दीये

लोगों के मुताबिक, कारोबार के लिहाज से गोरखपुर का दिल माने जाने वाले साहबगंज से इसकी शुरुआत 1944 में हुई थी. शुरू में गोरखपुर की परंपरा के अनुसार इसमें कीचड़ का ही प्रयोग होता है. हुड़दंग अलग से. अपने गोरखपुर प्रवास के दौरान नानाजी देशमुख ने इसे नया स्वरूप दिया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सक्रिय भागीदारी से इसका स्वरूप बदला, साथ ही लोगों की भागीदारी भी बढ़ी.

होली के दिन सुबह भगवान नरसिंह की शोभायात्रा घंटाघर चौराहे से शुरू होती है. जाफराबाजार, घासीकटरा, आर्यनगर, बक्शीपुर, रेती चौक और उर्दू होते हुए घंटाघर पर ही जाकर समाप्त होती है. होली के दिन की इस शोभायात्रा से एक दिन पहले घंटाघर से ही होलिका दहन शोभायात्रा निकाली जाती है. इसमें भी गोरक्षपीठाधीश्वर परंपरागत रूप से शामिल होते हैं.”
(एजेंसी से इनपुट)