नई दिल्‍ली: रंगों का त्यौहार होली दो दिन का त्यौहार है, जो कि पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल, होलिका दहन 20 मार्च यानी आज है और होली 21 मार्च 2019 को पड़ रही है. वैसे तो होली का आगाज लगभग 40 दिन पहले हो जाता है, जब होलिका दहन की तैयारी शुरू होती है. इसके लिए लोग घास, लकड़ी और उपले आदि से अलाव तैयार करते हैं. होली पूजा या होलिका दहन ज्यादातर शुभ समय पर होता है, जो कि सूर्यास्त के बाद किया जाता है.

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एक प्राचीन कहानी के अनुसार, होलिका दहन वह दिन है जब होलिका को जलाकर राख कर दिया गया था. इस दिन, लोग भगवान शिव और भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं. यह त्योहार एक प्राचीन हिंदू त्योहार है जो गैर-हिंदुओं के बीच काफी लोकप्रिय है और बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है. फाल्गुन के महीने में होली आती है और त्योहार बहुत प्यार, रंग और उत्‍साह के साथ मनाया जाता है. होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है.

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होलिका दहन को लेकर मान्‍यता
मान्‍यता है कि इस दिन को राजा हिरण्यकश्यप और होलिका पर भक्त प्रहलाद की जीत के रूप में मनाया जाता है. दरअसल होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी और उसे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था, जबकि हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, जो कि हिरण्यकश्यप को बिल्कुल भी पसंद नहीं था. इसलिए एक दिन हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे की विष्णु भक्ति से परेशान होकर उसे होलिका के साथ आग में जलने के लिये बिठा दिया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गया और होलिका आग में जल गई. तभी से होलिका दहन का ये त्योहार मनाया जाने लगा. इस दिन होलिका दहन के समय जलती हुई आग में से भक्त प्रहलाद के प्रतीक स्वरूप मिट्टी में दबाये गये डंडे को निकाला जाता है, जबकि डंडे के आस-पास लगी हुई लकड़ियों को जलने दिया जाता है.

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