Indira Ekadashi 2019 का व्रत तभी संपूर्ण माना जाता है जब विधि-विधान से इस व्रत का पारण किया जाए. Also Read - Indira Ekadashi 2020: इंदिरा एकादशी आज जानें क्या है इसका महत्व, व्रत कथा सुनने से पितरों को मिलता है मोक्ष

कब होती है इन्दिरा एकादशी
अश्विन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. चूंकि कि ये एकादशी पितृपक्ष में आती है, इसलिए इसे पितरों की मुक्ति के लिए काफी अहम माना जाता है. Also Read - Indira Ekadashi 2020 Date & Time: जानें कब है इंदिरा एकादशी, ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

इसे श्राद्ध पक्ष एकादशी भी कहा जाता है. इस व्रत को करने से दूसरे लोक में पितरों की आत्मा को शान्ति मिलती है. पुराणों में इस बात का वर्णन है कि इस एकादशी व्रत का प्रभाव साधक के मरणोपरांत भी रहता है. Also Read - Indira Ekadashi 2019: इंदिरा एकादशी तिथि, महत्‍व, श्रीहरि पूजन और व्रत विधि

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क्‍या होता है पारण
एकादशी व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद यानी द्वादशी ति‍थि को पारण किया जाता है.

कब करें पारण
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी ति‍थि को हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए. जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए. हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को कहते हैं.

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पारण मुहूर्त
इंदिरा एकादशी पारणा मुहूर्त: सुबह 06:11 बजे से 08:35 बजे तक (26 सितंबर)
अवधि: 2 घंटे 24 मिनट

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