नई दिल्ली. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आप यदि भगवान का दर्शन करने मथुरा-वृंदावन जा रहे हों, तो मथुरा के आसपास स्थित गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल आदि जगहों पर जाना न भूलें. इन स्थानों पर भी आपको भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होंगे. पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, ब्रज भूमि के कण-कण में भगवान का वास है. इसलिए मथुरा और वृंदावन के आसपास स्थित इन जगहों को भी तीर्थस्थलों के रूप में ही जाना जाता है. नंदगांव, गोकुल, बरसाना जैसी जगहों पर भगवान कृष्ण के बचपन से लेकर उनके किशोर होने तक की कहानियां हैं, जो इन जगहों पर जाने के बाद ही आपको सुनने को मिल सकती हैं. आइए वृंदावन से सटे इन स्थानों के बारे में जान लेते हैं. Also Read - Krishna Janmashtami 2019: ‘नन्द के आनंद भए, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष के साथ कृष्ण जन्म के समय झूम उठे श्रद्धालु

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गोवर्धन
मथुरा से लगभग 24 किलोमीटर दूर पश्चिम की दिशा में डीग-अलवर मार्ग पर स्थित गोवर्धन, वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. यहां गोवर्धन पहाड़ की पूजा साक्षात श्रीकृष्ण के रूप में की जाती है. साल में एक बार गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं. हर महीने की पूर्णिमा, पुरुषोत्तम मास के अलावा सावन और भादो के महीनों में तो इस स्थान की महत्ता और भी बढ़ जाती है. 7 किलोमीटर लंबे पर्वत की परिक्रमा के दौरान इस स्थान के धार्मिक माहौल की रंगत देखते ही बनती है. Also Read - Janmashtami 2018: भगवान कृष्ण पर होगा झारखंड के नगर उंटारी रेलवे स्टेशन का नाम, केंद्र ने दी मंजूरी

Govardhan

बरसाना
गोवर्धन पर्वत से आगे बढ़ने पर आपको बरसाना मिलता है. इस कस्बे को श्रीकृष्ण की आहलादिनी शक्ति या प्रेमिका राधा रानी की नगरी कहा जाता है. इसका प्रचीन नाम वृषभानपुर और वृहत्सानौ है. बरसाना को ब्रजयात्रा के पड़ाव स्थल के रूप में भी जाना जाता है. यहां राधारानी का मंदिर, राधिकाजी का महल, जयपुर वाला मंदिर के अलावा चित्र-विचित्र शिलाएं देखने योग्य स्थान हैं. इसके अलावा राधागोपाल जी का विशाल मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान है. वहीं अष्ट सखी मंदिर, भानोखर, कीर्ति कुंड, मुक्ता कुंड, पीरी पोखर, वृषभानु मंदिर आदि भी यहां के दर्शनीय स्थल हैं. बरसाने की प्रसिद्ध लठमार होली भी प्रसिद्ध है.

गोकुल
मथुरा में जेल में जन्म के बाद वसुदेव ने अपने बच्चे कृष्ण को आततायी कंस के प्रकोप से बचाने के लिए उफनाती यमुना को पार किया और भगवान को नंद और यशोदा के यहां गोकुल पहुंचा दिया था. भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल्यावस्था गोकुल में ही गुजारी थी. इसलिए मथुरा के पास स्थित गोकुल का भी धार्मिक महत्व है. यहां गोकुल नाथजी मंदिर, दाऊजी मंदिर आदि कई दर्शनीय स्थान हैं. इसके अलावा ठकुरानी घाट, यशोदा घाट आदि यमुना के घाट भी हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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नंद गांव
मथुरा जहां भगवान कृष्ण के कर्म क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, वहीं नंद गांव को लीला-पुरुषोत्तम के गांव के रूप में मान्यता प्राप्त है. यहां स्थित नंदजी का भवन पहाड़ी पर बना हुआ है. यहां ऐसे कई स्थान हैं जिन्हें श्रीकृष्ण की लीला स्थली कहा जाता है. पान सरोवर, श्री बल्लभाचार्य जी की बैठक, श्री रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वमी की कुटिया, मोती कुंड, श्याम पीपरी, टेर कदंब, यशोदा कुंड, नंद पोखरा, जल विहार, छाछ कुंड, छछियारी देवी आदि मंदिर यहां के प्रमुख स्थलों में से एक हैं.