नई दिल्ली: जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है. इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत हो जाता है. इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनाई जाएगी. जो भक्त जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं वह जन्माष्टमी के एक दिन पहले केवल एक ही समय भोजन करते हैं. पौराणिक गंथों और शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था. भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणा नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है.Also Read - यूपी में जन्माष्टमी के दिन क्यों गई बिजली, STF करेगी जांच, सीएम योगी ने दिए आदेश

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त (Janmashtami 2020 subh muhurat) Also Read - Janmashtami 2020 Mathura: मथुरा-वृन्दावन में जन्माष्टमी की धूम, कुछ ऐसे मनाया जा रहा जश्न, देखें VIDEO

कृष्ण जन्माष्टमी मंगलवार, अगस्त 11, 2020 को
निशिता पूजा का समय – 12:05 ए एम से 12:47 ए एम, अगस्त 12
अवधि – 00 घण्टे 43 मिनट्स
पारण समय – 11:16 ए एम, अगस्त 12 Also Read - Janmashtami 2020 Mathura Live Streaming: मथुरा-द्वारका में लड्डू गोपाल के जन्म का लाइव प्रसारण, ऐसे देखें...

जन्माष्टमी पूजा विधि (Janmashtami 2020 Puja Vdhi)
व्रत वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद होकर सभी देवताओं के नमस्कार करे पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें. हाथ में जल, फल और पुष्प को लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल स्नान करने के लिए देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाए. अब सुतिका गृह में सुंदर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश की स्थापना करें. इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या  चित्र का स्थापना करें. पूजा में देवकी, वासुदेव, बलराम, नन्द , यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम लेते हुए विधिवत पूजा करें. यह व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है. इस व्रत में अनाज नहीं खाया जाता है. फलाहर के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है.