Dahi Handi 2018: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन दही हांडी की प्रथा जरूर मनाई जाती है. देश के अलग-अलग शहरों में बच्चे से लेकर बड़े तक पिरामिड्स बनाकर दही हांडी प्रतियोगिता करते हैं. आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर कृष्ण जन्माष्टमी के दिन दही हांडी की प्रथा क्यों निभाई जाती है. तो हम आपको आज यहां आपको इसके पीछे की कहानी बता रहे हैं.Also Read - जन्माष्टमी: इस्कॉन मंदिर पंहुचे अरविंद केजरीवाल, भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया, झूला झुलाया

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दरअसल, बाल कृष्ण को माखन और दही से खास प्रेम है. उन्हें प्यार करने वाले माखन चोर भी कहते हैं. बचपन में कान्हा की माखन चोरी से ग्वालिनें खूब परेशान रहती थीं और यशोदा के पास आकर माखन चोरी की शिकायत करती थीं. ग्वालिनें कान्हा के डर से माखन से भरी दही हांडी को ऊंचाई पर टांग देती थी, लेकिन कान्हा अपने दोस्तों की पीठ पर चढ़कर वह उतार लाता और उसे खाकर खत्म कर देता था.

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इसलिए, श्री कृष्ण के जन्मदिन पर दही हांडी की प्रथा निभाई जाती है. इस दिन कान्हा का रूप लेकर बच्चे और बड़े दही हांडी तोड़ते हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों में दही हांडी प्रतियोगिता आयोजित की जाती है.

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