Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी के दिन बन रहा है बेहद ही अद्भत संयोग, इस मुहूर्त में पूजा करने से दूर होंगे जन्मों के पाप

Jaya Ekadashi 2026: धर्म शास्त्रों में जया एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है और इस दिन व्रत रखने वाले जातक को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है.

Written by: Renu Yadav
Published: January 22, 2026, 4:19 PM IST

Jaya Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व होता है और कहते हैं कि एकादशी व्रत रखने वाले जातक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है. वैसे तो प्रत्येक माह आने वाली एकादशी खास होती है लेकिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी बहुत ही फलदायी मानी गई है जिसे जया एकादशी कहा जाता है. जया एकादशी के दिन श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है और इस व्रत को रखने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. इतना ही नहीं, यह व्रत जातक को पिशाच योनि यानि कष्टदायी योनि से भी मुक्ति दिलाता है. इस साल जया एकादशी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं जिन्हें बहुत ही फलदायी माना गया है.

जया एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी और 29 जनवरी को रात 1 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार इस साल जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन किया जाता है और जया एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा.

Gajkesari Yog 2026: इन 4 राशियों के लिए कुबेर का खजाना खोलेगा गजकेसरी योग, बढ़ेगी कमाई और लगेगा धन का अंबार 6

जया एकादशी पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग

जया एकादशी का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है और इस दिन जया एकादशी के दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं. वैदिक पंचांग व ज्योतिषीय गणना के अनुसार जया एकादशी के दिन इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योगों में श्रीहरि भगवान विष्णु की पूजा व दान करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. इन योगों को सुख-समृद्धि का दाता भी कहा गया है.

जया एकादशी के दिन कैसे करें पूजा

जया एकादशी का व्रत रखने से जातक को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और सभी पाप भी मिट जाते हैं. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद मंदिर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें और पीले फूल, पीले फल, अक्षत, धूप व दीप अर्पित करें. भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमे तुलसी दल यानि तुलसी का पत्ता जरूर डालें. कहते हैं कि तुलसी दल के बिना भगवान विष्णु का भोग अधूरा होता है. फिर जया एकादशी व्रत की कथा पढ़ें और भगवान विष्णु की आरती करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Astrology की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.