जितिया व्रत 2018: आज जितिया है. आज के दिन को खुर जिउतिया भी कहा जाता है. इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, पूजन करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं. ऐसी मान्यता है कि जितिया व्रत रखने वाली माताओं की संतानों के जीवन में कभी कष्ट नहीं आता और उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती. पुत्रों के जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती और पारिवार में सुख शांति बनी रहती है.

जितिया व्रत तीन दिनों का व्रत होता है. यह अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तक मनाया जाता है. सप्तमी के दिन नहाय खाय होता है और दूसरे दिन यानी अष्टमी के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. तीसरे और आखिरी दिन पारण होता है.

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जितिया के पारण के नियम दूसरे व्रतों से थोड़े अलग हैं. आमतौर पर दूसरे व्रत के पारण के लिए कहा जाता है कि जितनी जल्दी पारण कर लें अच्छा होगा. लेकिन इसमें ऐसा नहीं है. आप चाहें तो सुबह 10 बजे तक भी पारण कर सकते हैं.

व्रत पारण का मुहूर्त

अष्टमी तिथि शुरू: 2 अक्टूबर 2018 सुबह 4 बजकर 9 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त: 3 अक्टूबर 2018 सुबह 2 बजकर 17 मिनट तक

अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रती किसी भी वक्त पारण कर सकती हैं. इसमें समय की कोई बाध्यता नहीं है. बस दोपहर से पहले पारण कर लें.

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व्रत पारण की विधि:

1. सबसे पहले सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण कर लें.
2. सूर्य देवता और तुलसी जी को जल अर्पित करें.
3. इसके बाद जीमूतवाहन की पूजा करें.
4. पूजा सम्पन्न होने के बाद अपना व्रत खोलें और पारण करें.
5. पारण की विधि अलग-अलग जगहों पर भिन्न हैं. कुछ क्षेत्रों में इस दिन नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी या रागी की रोटी आदि खाई जाती है.
6. पंडित या किसी जरूरतमंद को दान दक्षिणा भी दे सकते हैं.

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