उत्तराखण्ड में हुई बारिश से टनकपुर-चंपावत मार्ग पर सूखीढांग के पास 10 मीटर रोड बह गई है, जिस कारण रास्ता बंद हो गया है. इस कारण कई यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा बीच में ही छोड़ दी है.

उच्च हिमालयी क्षेत्र के रास्तों की खराब हालत को देखते हुए छह यात्रियों ने यात्रा बीच में ही छोड़ दी है_ 56 सदस्यीय इस दल के अब तक आठ लोग यात्रा छोड़ चुके हैं.

कैलाश यात्रा के पैदल मार्ग छंकन, लामारी और मालपा में रास्ते खराब होने और पहाड़ियों से भूस्खलन होने के चलते यात्रियों को वापस धारचूला लौटा दिया गया था. यात्रियों को पर्यटक आवास गृह में ही रोका गया.

कुमांयू मण्डल विकास के जनरल मैनेजर अशोक जोशी ने बताया, “भारी बारिश के कारण मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को रोकना पड़ा है. क्योंकि शंकम और लमारी के बीच पड़ने वाले नाले में बना लकड़ी का पुल भूस्खलन की वजह से टूट गया है. जिससे पैदल चलना मुश्किल है. इस कारण कुछ यात्रियों को रोका गया है. शेष लोगों की छुट्टिया खत्म हो रही हैं. इस कारण वे वापस जा रहे हैं. हालांकि रोड मरम्मत का कार्य तेजी से जारी है. जल्द ही यात्रा एक-दो दिन में शुरू हो जाएगी.”

अपनी पत्नी के साथ मानसरोवर यात्रा कर रहे नैनीताल के रोहित गर्ग ने बताया कि “तेज बारिश के कारण चार जगह भूस्खलन हुआ है. इस कारण हम लोगों को सुरक्षित स्थान पर रोका गया है। कल सुबह मौसम ठीक रहा तो यात्रा पुन: शुरू हो जाएगी.”

मुंबई निवासी राजेश मनानी ने बताया, “हम लोग तेजी से अपनी यात्रा करते हुए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक भूस्खलन और ऊपर से पहाड़ों के खिसकने के कारण यात्रा रोकनी पड़ी. हमारे दल के 13 लोग हम लोगों से आगे झांकन तक पहुंच गए थे. लेकिन बाद में वहां भी मौसम खराब होने कारण एनडीआरएफ उन्हें वापस लाई है. लगभग 13 से 14 यात्रियों ने यहीं से अपनी यात्रा रद्द कर दी और वे घर चले गए. उन्हें अपने व्यक्तिगत कार्य थे.”

उत्तराखण्ड में आपदा से अब तक 59 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 55 घायल और 12 लापता हैं. वहीं आपदा से उत्तरकाशी जिले की तहसील मोरी के कोटीगाड़ क्षेत्र का करीब 70 वर्ग किमी क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है.