जब बाबा नीम करौली के दर से देश के प्रधानमंत्री को लौटना पड़ा था बैरंग... कैंची धाम में क्यों फेल हो गया था 'VVIP प्रोटोकॉल'?
Kainchi Dham Foundation Day 2026: जब बाबा नीम करौली से मिलने पहुंचे पीएम लाल बहादुर शास्त्री, तो अचानक हुआ ऐसा चमत्कार कि उड़ गए सबके होश. पढ़ें कानपुर के सरसैया घाट का वो अनसुना किस्सा.
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Neem Karoli Baba miracles: अध्यात्म की दुनिया में जब कोई संत अपनी भक्ति में होता है, तो उसके सामने संसार की बड़ी से बड़ी हुकूमत और सत्ता का रसूख भी बौना साबित हो जाता है. बाबा नीम करौली को हनुमान जी का परम भक्त और साक्षात चमत्कारी पुरुष माना जाता है. उनके ब्रह्मलीन होने के दशकों बाद भी भक्तों के बीच उनकी आस्था अटूट है. बाबा के जीवन से जुड़े अनगिनत प्रसंग हैं, लेकिन उनमें से एक ऐतिहासिक किस्सा ऐसा भी है जब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री से मिलने से साफ इनकार कर दिया था. बाबा के दर पर कोई 'VVIP प्रोटोकॉल' काम नहीं आता था, और इस घटना ने साबित कर दिया कि भगवान और भक्त के बीच किसी तीसरे की कोई जगह नहीं होती.
जब कानपुर प्रवास पर पहुंचे थे देश के शीर्ष राजनेता
यह अद्भुत वाकया उस समय का है जब बाबा नीम करौली अपने कानपुर प्रवास पर थे. बाबा सरसैया घाट पर मौजूद थे और उनके चारों तरफ करीब 200 भक्तों की भीड़ जुटी हुई थी. हर कोई बाबा के दर्शन और उनकी अमृतवाणी सुनने को लालायित था. इसी दौरान वहां कानपुर के डीएसपी कुछ पुलिसकर्मियों और सिपाहियों के साथ पहुंचे. डीएसपी ने बाबा के समीप आकर बड़े आदर से निवेदन किया कि देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और वरिष्ठ नेता गुलजारीलाल नंदा उनके दर्शन के लिए आए हैं और उनसे मुलाकात करना चाहते हैं.
और देखते ही देखते प्रकाश में विलीन हो गए बाबा
बाबा नीम करौली ने डीएसपी की बात सुनते ही प्रधानमंत्री से मिलने से दो टूक शब्दों में मना कर दिया. हालांकि, पुलिस अधिकारियों को लगा कि चूंकि मामला देश के प्रधानमंत्री का है, इसलिए बाबा के मना करने के बावजूद उन्हें भीतर ले आना चाहिए. पुलिसकर्मी लाल बहादुर शास्त्री और गुलजारीलाल नंदा को लेकर उस भवन की ओर बढ़े जहां बाबा विराजमान थे लेकिन तभी वहां एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने सबके होश उड़ा दिए. जैसे ही प्रधानमंत्री ने कदम आगे बढ़ाए, बाबा नीम करौली अचानक एक दिव्य प्रकाश में विलीन हो गए और वहां से अदृश्य हो गए.
सत्ता के रसूख पर भारी पड़ी संत की मर्जी
वहां मौजूद हर शख्स यह चमत्कार देखकर सन्न रह गया. देश के प्रधानमंत्री और उनके साथ आए सुरक्षाकर्मी सब देखते रह गए, लेकिन बाबा का कहीं कोई अता-पता नहीं था. कुछ देर तक इंतजार करने के बाद, जब बाबा प्रकट नहीं हुए, तो लाल बहादुर शास्त्री और गुलजारीलाल नंदा को वहां से मायूस होकर बैरंग ही लौटना पड़ा. उनके जाने के कुछ ही समय बाद, वहां दोबारा कौतूहल हुआ और बाबा नीम करौली अचानक फिर से अपने भक्तों के बीच आकर बैठ गए.
क्यों खड़ी की मेरे और भक्त के बीच पुलिस की दीवार?
बाबा को वापस देखकर एक उत्सुक भक्त ने उनसे पूछ ही लिया, बाबा, आखिर आपने देश के प्रधानमंत्री से मुलाकात क्यों नहीं की? इस पर बाबा ने जो जवाब दिया, वह आज भी हर इंसान के लिए एक बहुत बड़ी सीख है.
बाबा ने बेहद सहजता से कहा, जब मैं किसी खास और आम भक्त में कोई फर्क नहीं करता, तो उन्हें भी खास बनकर मेरे पास नहीं आना चाहिए था. उन्होंने मेरे और मेरे भक्तों के बीच में पुलिस की यह दीवार क्यों खड़ी कर दी? यही वजह थी कि मैंने उनसे मुलाकात नहीं की. अगर वे एक साधारण और आम इंसान बनकर मेरे पास आते, तो मैं उनसे जरूर मिलता.
आज भी जिंदा है बाबा की यह सीख
बाबा नीम करौली इस घटना के जरिए अपने भक्तों को यह समझाना चाहते थे कि अध्यात्म के मार्ग में और आराध्य के सामने कभी भी अहंकार या पद का रसूख नहीं लाना चाहिए. भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता सिर्फ और सिर्फ सच्ची श्रद्धा, आस्था और निष्कपट मन का होता है. आज भी बाबा के दर पर वीवीआईपी कल्चर पूरी तरह बेअसर है, क्योंकि वहां आज भी सिर्फ एक साधारण भक्त की पुकार ही सुनी जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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