Kajari Teej 2018: हिन्दू पंचांग के अनुसार भादों के कृष्ण पक्ष की तीज को कजरी या कजली तीज कहते हैं. इसे बड़ी तीज भी कहा जाता है. इस बार कजरी तीज का त्योहार बुधवार 29 अगस्त को मनाया जाएगा.

कजरी तीज का महत्व

साल में चार तीज मनाई जाती है. अखा तीज, हरियाली तीज, कजरी तीज, हरतालिका तीज. अन्य तीज व्रत की तरह ही कजरी तीज भी सुहाग की रक्षा और वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि बनाए रखने के लिए की जाती है. सुहागिनें जहां अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छा वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं.

Kajari Teej 2018: जानें कब है कजरी तीज, पूजन का शुभ मुहूर्त

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कजरी तीज व्रत एवं पूजन विधि:

1. व्रत से एक दिन पहले पूजा में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें एकत्रित कर लें. जैसे कि कुमकुम, काजल, मेहंदी, मौली, अगरबत्ती, दीपक, तीज गीत की किताब, कुछ सिक्के, चावल, कलश, फल, नीम की एक डाली, दूध, ओढ़नी, सत्तू, घी, दीप जलाने के लिए माचिस.

2. कजरी तीज के दिन शुभ मुहूर्त में रेत से एक तालाब बना लें. तालाब ऐसे बनाएं कि उससे पानी बाहर ना निकले.

3. अब इस तालाब के किनारे नीम की डाल लगा दें. यह तीज माता का प्रतीक है.

4. नीम की डाल पर लाल रंग की चुनरी ओढ़ा दें.

5. अब इसके पास गणपति और मां लक्ष्मी की मूर्ति रख दें.

6. कलश में मौली लपेटें और उस पर स्वास्तिक बना लें. अब कलश की पूजा कुमकुम, चावल, सत्तू और सिक्के से करें.

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7. गणेश जी और मां लक्ष्मी जी को भी कुमकुम, चावल, सत्तू, गुड़, सिक्का और फल चढ़ाएं.

8. इसी तरह तीज माता यानी नीम की डाल की भी पूजा करें.

9. अब तालाब में दूध और पानी डालें.

10. अगर विवाहित स्त्री यह व्रत कर रही हैं तो ताला के पास कुमकुम, मेहंदी और काजल के सात गोल डॉट्स बनाना होता है. अगर अविवाहित लड़कियां इसे कर रही हैं तो उन्हें यह 16 बनाना होगा.

11. ऐसा करने के बाद दीप और अगरबत्ती जलाएं.

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12. व्रत कथा का पाठ करें.

13. कथा पूरी हो जाने के बाद तालाब में सत्तू, फल, सिक्के और ओढ़नी का प्रतिबिंब देखें. याद रखें कि प्रतिबिंब बस चढ़ाई गई चीजों का ही देखना है. तालाब में दीप, गहनों और साड़ी के पल्ले को भी देखें.

14. फिर चंद्रमा को जल चढ़ाएं. चंद्रमा को जल के छींटे देकर रोली, मोली, अक्षत चढ़ायें और फिर भोग अर्पित करें.

15. चांदी की अंगूठी और आखे (गेहूं के दाने) हाथ में लेकर जल से अर्घ्य दें और एक ही जगह खड़े होकर चार बार घुमें.

16. इसके बाद कजरी गीत गाएं. माता तीज से अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना करें और माता तीज की परिक्रमा करें. परिक्रमा तीन बार करें.

कजरी तीज का पारण कैसे करें:

कजरी तीज का पारण भी चंद्रमा की पूजा और दर्शन के बाद होता है. यदि चांद उदय होते नहीं दिख पाये तो रात्रि में लगभग 11:30 बजे आसमान की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है.

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