Kajari Teej 2019 के व्रत की पूजा के दौरान कथा का काफी महत्‍व है. यह व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता, जब तक कि इसकी व्रत कथा ना पढ़ी जाए.

कजरी तीज व्रत कथा
एक गांव में गरीब ब्राह्मण का परिवार रहता था. ब्राह्मण की पत्नी ने भाद्रपद महीने में आने वाली कजरी तीज का व्रत रखा और ब्राह्मण से कहा, हे स्वामी आज मेरा तीज व्रत है. कहीं से मेरे लिए चने का सत्तू ले आइए. लेकिन ब्राह्मण ने परेशान होकर कहा कि मैं सत्तू कहां से लेकर आऊं भाग्यवान. इस पर ब्राहमण की पत्नी ने कहा कि मुझे किसी भी कीमत पर चने का सत्तू चाहिए.

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इतना सुनकर ब्राह्मण रात के समय घर से निकल पड़ा. वह सीधे साहूकार की दुकान में गया और चने की दाल, घी, शक्कर आदि मिलाकर सवा किलो सत्तू बना लिया. इतना करने के बाद ब्राह्मण अपनी पोटली बांधकर जाने लगा. तभी खटपट की आवाज सुनकर साहूूकार के नौकर जाग गए और वह चोर-चोर आवाज लगाने लगे.

ब्राह्मण को उन्होंने पकड़ लिया. साहूकार भी वहां पहुंच गया. ब्राह्मण ने कहा कि मैं बहुत गरीब हूं और मेरी पत्नी ने आज तीज का व्रत रखा है. इसलिए मैंने यहां से सिर्फ सवा किलो का सत्तू बनाकर लिया है. ब्राह्मण की तलाशी ली गई तो सत्तू के अलावा कुछ भी नहीं निकला. उधर चांद निकल आया था और ब्राह्मण की पत्नी इंतजार कर रही थी.

साहूकार ने कहा कि आज तुम्हारी पत्नी को मैं अपनी धर्म बहन मानूंगा. उसने ब्राह्मण को सातु, गहने, रुपये, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर अच्छे से विदा किया. सबने मिलकर कजली माता की पूजा की. जिस तरह ब्राह्मण के दिन फिरे वैसे सबके दिन फिरे. कजरी माता अपनी कृपा सब पर करें.

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व्रत नियम
– यह व्रत सामान्यत: निर्जला रहकर किया जाता है. यानी इस दिन व्रती पानी भी नहीं पीती.
– गर्भवती स्त्री फलाहार कर सकती हैं. पानी पी सकती हैं.
– सबसे अच्‍छा माना गया है कि चांद उगते देखें. अगर नहीं देख सके हैं तो रात 11:30 बजे आकाश की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है.
– उद्यापन के बाद भी उपवास रहता है. अगले दिन तोड़ा जाता है. जो लोग नहीं कर सकते वे उद्यापन के बाद फलाहार कर सकते हैं.

कजरी तीज 2019 तिथि
इस बार कजरी तीज 18 अगस्त 2019, रविवार को है.