
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Kalnemi Kaun Tha: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है और हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में बड़ा बया दिया है. सीएम योगी ने सनातन धर्म और राष्ट्र पर तीखी व स्पष्ट बात करते हुए कहा कि आज धर्म की आड़ में कई लोग सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं और समाज को ऐसे लोगों से रहने की जरूरत है. हालांकि, सीएम योगी ने ऐसे लोगों का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्हें ‘कालनेमि’ बताया. उन्होंने कहा कि ये लोग बाहर से बहुत ही धार्मिक नजर आते हैं लेकिन भीतरी तौर पर यह धर्म विरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. सीएम योगी के इस बयान में कालनेमि का जिक्र किया गया, जिसके बारे में कई लोग नहीं जानते हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार कालनेमि एक मायावी राक्षस था जो कि लंकापति रावण का एक शक्तिशाली अनुचर था और रावण के मामा मारीच का पुत्र था. कालनेमि रूप बदलने में माहिर था और उसमें भम्र पैदा करने का गुण था. कालनेमि रावण की सेवा में हमेशा तत्पर रहता था और छल-कपट जैसे कार्यों में उसे महाराथ हासिल थी. युद्ध के दौरान रावण के पुत्र मेघनाथ ने लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया था जिसके बाद उनके प्राण बचाने के लिए हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी लेने गए.
हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत पर जाने से रोकने के लिए रावण ने कालनेमि का इस्तेमाल किया. रावण जानता था कि अगर सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी नहीं पहुंच पाई तो लक्ष्मण के प्राण नहीं बच पाएंगे. ऐसे में रावण ने मायावी कालनेमि को हनुमान जी का रास्ता रोकने के लिए भेजा. कालनेमि ने अपनी माया से रास्ते में एक सुंदर आश्रम, सरोवर और मंदिर का निर्माण किया और फिर खुद एक साधु का वेश धारण करके राम-राम का जाप करने लगा.
जब हनुमान जी उस मार्ग से निकले तो उन्होंने राम नाम का जाप कर रहे साधु रूपी कालनेमि को देखा और वहां रूक गए. तब कालनेमि ने हनुमान जी को आश्रम में भोजन करने और कुछ समय विश्राम करने को कहा. ताकि हनुमान जी को संजीवनी लाने में देरी हो जाए. कालनेमि ने हनुमान जी को अपनी मायावी बातों में फंसाकर सरोवर में स्नान करने को कहा.
लेकिन जैसे ही हनुमान जी सरोवर में स्नान करने के लिए उतरे तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और हनुमान जी ने उसका वध किया. जैसे ही मगरमच्छ की मृत्यु हुई उसमें से एक खूबसूरत अप्सरा निकली जो कि किसी श्राप के कारण मगरमच्छ बन गई थी. उस अप्सरा ने हनुमान जी को बताया कि आश्रम में बैठा साधु वास्तव में कोई साधु नहीं है, बल्कि साधु के रूप में मायावी कालनेमि है. जिसे रावण ने आपका रास्ता रोकने के लिए भेजा है. इसके बाद हनुमान जी ने कालनेमि का वध किया और संजीवनी बूटी लेकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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