Kamda Ekadashi 2026: पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का द्वार हैं ये 24 एकादशियां, आज कामदा एकादशी पर जानें सभी के नाम और विशेष महत्व
Kamda Ekadashi 2026: 29 मार्च 2026 को हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी है. आज कामदा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु जगत के पालनहार विष्णु जी से सुख-शांति की कामना कर रहे हैं.माना जाता है कि आज भगवान विष्णु के व्रत और पूजा से मनोकामना प्राप्ति होती है.
Kamda Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'कामदा एकादशी' कहा जाता है. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, जिसे 'व्रतों में उत्तम' माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है.
एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं, और प्रत्येक का अपना विशिष्ट महत्व, कथा और फल होता है. आइए जानते हैं साल भर की इन 24 पुण्यदायी तिथियों के बारे में.
चैत्र मास से फाल्गुन मास तक की एकादशियां
- पापमोचिनी एकादशी (चैत्र कृष्ण पक्ष): जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी पुराने पापों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए जानी जाती है.
- कामदा एकादशी (चैत्र शुक्ल पक्ष): यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी है. यह कष्टों का निवारण करने वाली और इच्छाओं की पूर्ति करने वाली मानी जाती है.
- वरुथिनी एकादशी (वैशाख कृष्ण पक्ष): इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है.
- मोहिनी एकादशी (वैशाख शुक्ल पक्ष): मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था. यह मोह-माया के बंधनों से मुक्त करती है.
- अपरा एकादशी (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष): यह अपार पुण्य देने वाली एकादशी है. इससे व्यक्ति को धन, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती.
- निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष): यह सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है, जिसमें बिना पानी पिए व्रत रखा जाता है. इसे करने से साल की सभी एकादशियों का फल मिल जाता है.
- योगिनी एकादशी (आषाढ़ कृष्ण पक्ष): यह एकादशी समस्त रोगों और शारीरिक व्याधियों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है.
- देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल पक्ष): इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है.
- कामिका एकादशी (श्रावण कृष्ण पक्ष): सावन मास की यह एकादशी पितृ दोष से मुक्ति और बिगड़े काम बनाने के लिए प्रसिद्ध है.
- पुत्रदा एकादशी (श्रावण शुक्ल पक्ष): संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले जातकों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है.
- अजा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण पक्ष): राजा हरिश्चंद्र ने इसी व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ राज्य और परिवार वापस पाया था.
- परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष): माना जाता है कि इस दिन शयन कर रहे भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे 'पार्श्व एकादशी' भी कहते हैं.
- इन्दिरा एकादशी (आश्विन कृष्ण पक्ष): पितृ पक्ष के दौरान आने वाली यह एकादशी पितरों की आत्मा की शांति और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए की जाती है.
- पापांकुशा एकादशी (आश्विन शुक्ल पक्ष): यह व्रत मन को पवित्र करता है और इंद्रियों पर नियंत्रण पाने में सहायक होता है.
- रमा एकादशी (कार्तिक कृष्ण पक्ष): दिवाली से पहले आने वाली यह एकादशी सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली है.
- देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल पक्ष): इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं. इसी दिन से विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू होते हैं.
- उत्पन्ना एकादशी (मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष): इसी दिन एकादशी देवी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे एकादशी व्रत की शुरुआत का दिन माना जाता है.
- मोक्षदा एकादशी (मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष): इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. यह मोक्ष दिलाने वाली तिथि है.
- सफला एकादशी (पौष कृष्ण पक्ष): यह व्रत कार्यों में सफलता सुनिश्चित करने वाला और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है.
- पुत्रदा एकादशी (पौष शुक्ल पक्ष): पौष मास की यह एकादशी भी संतान सुख और उनके उज्जवल भविष्य के लिए रखी जाती है.
- षटतिला एकादशी (माघ कृष्ण पक्ष): इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग (दान, स्नान, भोजन आदि) किया जाता है, जो पापों का नाश करता है.
- जया एकादशी (माघ शुक्ल पक्ष): यह एकादशी व्यक्ति को बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से बचाती है.
- विजया एकादशी (फाल्गुन कृष्ण पक्ष): भयंकर कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान राम ने भी इस व्रत का पालन किया था.
- आमलकी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल पक्ष): इसे 'आंवला एकादशी' भी कहते हैं. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है, जो उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है.
एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एकादशी का व्रत केवल उपवास मात्र नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि का माध्यम है. इस दिन चावल का त्याग करना अनिवार्य बताया गया है. भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस दिन 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप और रात्रि जागरण का विशेष फल मिलता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें. (Ai Generated Image)
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