Kartik Amavasya 2025: कब है कार्तिक अमावस्या? नोट करें सही डेट और जानें स्नान व दान का शुभ मुहूर्त

Kartik Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है और इस दिन गंगा में स्नान व दान करना बहुत ही शुभ व फलदायी होता है.

Published date india.com Published: October 14, 2025 9:16 AM IST
Kartik Amavasya 2025: कब है कार्तिक अमावस्या? नोट करें सही डेट और जानें स्नान व दान का शुभ मुहूर्त

Kartik Amavasya 2025: अमावस्या तिथि के दिन लोग गंगा में स्नान करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करते हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और ऐसा करने से जीवन में आ रहे सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. वैसे तो प्रत्येक माह आने वाली अमावस्या तिथि बहुत खास होती है लेकिन कार्तिक माह की अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है. इसे कार्तिक अमावस्या कहते हैं और इस दिन दिवाली का पर्व भी मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस साल कब है कार्तिक अमावस्या और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त.

कार्तिक अमावस्या 2025 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को शाम 3 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार कार्तिक अमावस्या का व्रत, दान व स्नान 21 अक्टूबर किया जाएगा. जबकि अमावस्या की रात को दिवाली का पूजन किया जाता है, इसलिए दिवाली का पर्व इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

Numerology: सबसे बेकार कपल साबित होते हैं इन तारीखों में जन्में लोग…शादी के बाद एक दिन भी सुकून से साथ नहीं रह पाते 7

कार्तिक अमावस्या स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म शास्त्रों में कार्तिक अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है. कार्तिक अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. पंचांग के अनुसार 21 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 5 बजकर 35 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इस अवधि में स्नान करने के बाद दान अवश्य करें. कहते हैं कि ऐसा करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

कार्तिक अमावस्या के दिन ऐसे करें पूजा

कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करना शुभ माना गया है. य​दि ऐसा संभव नहीं है तो घर में नहाते समय पानी में थोड़ा सा गंगाजल जरूर मिला लें. इसके बाद मंदिर को स्वच्छ करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. फिर विष्णु जी को चंदन लगाएं, पीले फूल और तुलसी दल यानि तुलसी के पत्ते अर्पित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और विष्णु चालीसा का पाठ करें. फिर पंचामृत का भोग लगाएं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Astrology की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.