Karva chauth 2019 पर चांद की विशेष पूजा की जाती है. छलनी से चांद देखती महिलाओं की तस्‍वीरों से ही करवाचौथ पर्व का पता चलता है.

हर साल महिलाएं इस परंपरा को निभाती हैं. पर क्‍या आप जानती हैं कि आखिर ऐसा क्‍यों किया जाता है. क्‍यों करवाचौथ की रात को छलनी से चांद देखकर ही व्रत तोड़ा जाता है. इसका महत्‍व क्‍या है.

छलनी से क्यों देखते है चांद
करवाचौथ की शाम को छलनी देखने के पीछे एक कथा है. काफी समय पहले एक साहूकार था. उसकी बेटी ने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा. लेकिन भूख से उसकी हालत खराब होने लगी.

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साहूकार के 7 बेटे थे. साहूकार के बेटों ने बहन से खाना खाने को कहा. लेकिन साहूकार की बेटी ने खाने से मना कर दिया.

भाइयों से जब बहन की हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद निकलने से पहले ही एक पेड़ की आड़ छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन को कहा कि चांद निकल आया है. तब उनकी बहन ने दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया.

व्रत खोलने के बाद उसके पति की मुत्यु हो गई. माना जाता है कि असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई.

यहीं से स्वयं अपने हाथ में छलनी लेकर चांद को देखने के बाद पति को देखकर करवा चौथ का व्रत खोलने की परंपरा शुरू हुई, ताकि कोई छल-कपट से किसी का व्रत न तुड़वा सके.

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