Karva chauth 2019 पर चांद की पूजा की जाती है. उन्‍हें देखने और उनका पूजन करने के बाद ही व्रत खोला जाता है.

करवाचौथ रखने वाली हर महिला को बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार होता है. इसके बाद वो छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखती है.

Karva chauth 2019 Moon Rise
इस बार करवाचौथ का पर्व 17 अक्‍टूबर, गुरुवार को है. चंद्रोदय रात 8:54 बजे पर होगा.

Karva Chauth 2019: 70 साल बाद बन रहा है मंगल योग, जानें व्रत रखने और खोलने का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ व्रत
सुहागिनें हर साल अपने पति की लंबी उम्र की कामना में करवाचौथ का व्रत रखती हैं. कहा गया है कि इस व्रत को रखने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाए जाने वाले पर्व को करवाचौथ के नाम से जाना जाता है. इस व्रत के दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि आवश्यक है.

पौराणिक कथा
पौराणिक कथा में ऐसा उल्लेख है कि जिस दिन भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग किया गया था उस दौरान उनका सिर सीधे चंद्रलोक चला गया था. ऐसा माना जाता है कि आज भी उनका वह सिर चंद्रलोक में मौजूद है. प्रथम पूज्य गणपति जी की पूजा हमेशा सबसे पहले की जाती है, इसलिए उनका सिर चंद्रलोक में होने के कारण चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा के बाद चंद्रमा की भी पूजा की जाती है.

करवा चौथ के दिन भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की पूजा होती है. मां पार्वती को अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त था. ऐसे में मां पार्वती की पूजा कर महिलाएं अखंड सौभाग्य का आर्शीवाद मांगने के लिए उपवास रखती हैं.

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