Karwa Chauth 2018 Muhurt: आज कार्त‍िक मास कृष्‍णपक्ष की चौथ है. आज के द‍िन मह‍िलाएं करवा चौथ का त्‍योहार मना रही हैं. अपनी पत‍ि की लंबी आयु के ल‍िए मह‍िलाएं आज न‍िर्जला व्रत रखती हैं और उनके अच्‍छे स्‍वाथ्‍य एवं सफलता के ल‍िए भगवान से प्रार्थना करती हैं.

आज के द‍िन मह‍िलाएं ब‍िल्‍कुल नई नवेली दुल्‍हन की तरह सजती हैं और 16 श्रृंगार करती हैं. शाम को पूजन करने के बाद चंद्र दर्शन करती हैं और अपने पत‍ि के हाथों जल ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं.

Karwa Chauth 2018: जानिये, करवा चौथ पर क्यों की जाती है चांद की पूजा

Karwa Chauth Pujan Timming and Muhurt: करवा चौथ पूजन का समय और मुहूर्त

करवा चौथ पूजा मुहूर्त: 05:40:34 से 06:47:42 तक
अवधि : 1 घंटे 7 मिनट
करवा चौथ चंद्रोदय समय : 07:55:00

Karwa Chauth Pujan Vidhi: करवा चौथ पूजन व‍िध‍ि

– करवा चौथ के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.

– संकल्प लेने के लिए इस मंत्र का जाप करें
‘‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये कर्क चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये’

– घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और चावल को पीसकर उससे करवा का चित्र बनाएं. इस रीति को करवा धरना कहा जाता है.

– शाम को मां पार्वती और शिव की कोई ऐसी फोटो लकड़ी के आसन पर रखें, जिसमें भगवान गणेश मां पार्वती की गोद में बैठे हों.

– मां पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं या उनका श्रृंगार करें.

– इसके बाद मां पार्वती भगवान गणेश और शिव की अराधना करें.

– चंद्रोदय के बाद चांद की पूजा करें और अर्घ्य दें.

– इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर या निवाला खाकर अपना व्रत खोलें.

– पूजन के बाद अपने सास ससूर और घर के बड़ों का आर्शीवाद जरूर लें.

– कोरे करवा में जल भरकर करवा चौथ व्रत कथा सुनें या पढ़ें.

Karwa Chauth Ki Katha : करवा चौथ की कथा

करवा चौथ की शाम होने वाली पूजा में एक कथा सुनाई जाती है, जिसमें वीरवती नाम की एक रानी की कहानी होती है. वीरवती सात भाईयों की एक बहन थी. सभी उसे बहुत लाड प्यार करते थे. वीरवती की जल्दी ही शादी हो गई और अपना पहला करवा चौथ व्रत करने के लिए वह मायके आ गई.

वीरवती ने व्रत के कड़े नियमों का पालन किया. लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतने लगा, वह चांद का बेसब्री से इंतजार करने लगी, ताकि वह व्रत खोल सके.

अपनी बहन को प्यासा और भूखा देखकर भाईयों को रहा नहीं गया. उन्होंने अपनी प्यारी बहन को इस स्थिति से निकालने के लिए एक उपाय लगाया. उन्होंने पीपल के पेड़ पर एक आईना जाकर लगा दिया, जो बिल्कुल चांद के समान दिख रहा था.

उन्होंने जाकर वीरवती को बताया कि चांद निकल गया है और अब वह व्रत खोल सकती है. वीरवती खुशी से फूले नहीं समाई और उसने चंद्र दर्शन कर जैसे ही अपने मुंह में एक निवाला डाला, घर के एक नौकर ने आकर ये समाचार दिया कि उसके पति की मौत हो गई है. वीरवती का दिल टूट गया और वह पूरी रात रोती रही.

क्योंकि वीरवती की कोई गलती नहीं थी, इसलिए देवी उसके सामने प्रकट हुईं. वीरवती ने उन्हें अपनी पूरी कहानी सुनाई. इस पर देवी ने कहा कि तुम एक बार फिर करवा चौथ का व्रत करो और इस बार नियमों का पालन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करना. वीरवती ने ऐसा ही किया. वीरवती ने पूरे साल चौथ का व्रत रखा और करवा चौथ आने पर पूरी श्रद्धा से व्रत रखा. वीरवती की निष्ठा को देखकर यम देवता को विवश होकर उसके पति को फिर से जीवित करना पड़ा.

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