Karwa Chauth 2023: सरगी के साथ होती है करवा चौथ व्रत की शुरुआत, जानिए महत्व और सरगी खाने का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2023: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. इस दिन सरगी का विशेष महत्व माना गया है.

Published date india.com Updated: October 30, 2023 9:30 AM IST
Karwa Chauth 2023: सरगी के साथ होती है करवा चौथ व्रत की शुरुआत, जानिए महत्व और सरगी खाने का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2023: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. जो कि पंचांग के अनुसार इस साल 1 नवंबर 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा. यह व्रत हर सुहागिन महिला के लिए बहुत ही खास होता है और इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही इस व्रत का पारण होता है. करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना से रखा जाता है. करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सरगी के साथ होती है जो कि सास अपनी बहु को देती है. यह सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाई जाती है और इसका विशेष महत्व माना गया है. आइए जानते हैं इस बार सरगी खाने का शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानिए करवा चौथ के दिन सरगी का महत्व.

सरगी लेने का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सरगी के साथ होती है और व्रत शुरू होने से पहले सरगी ली जाती है. यानि सूर्योदय से पहले पहले सरगी खाई जाती है. सरगी ग्रहण करने से पहले स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें और फिर सास के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है. इस साल सरगी लेने का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से पहले होता है. यानि 1 नवंबर को सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें. इसे भी पढ़ें: Karwa Chauth 2023: करवा चौथ के दिन सास को करवे के साथ जरूर दें ये चीजें, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

क्या होती है सरगी और जानें इसका महत्व?

करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सरगी के साथ होती है. जो कि सास अपनी बहु को आशीर्वाद के तौर पर देती हैं. यदि सास न हो तो जेठानी, ननद या घर की कोई बुजुर्ग महिला भी सरगी दे सकती है. सरगी की थाली में सास अपनी बहु को 16 श्रृंगार के साथ ही मिठाईयां और ड्राई फ्रूट्स आदि देती हैं. कुछ लोगों को शायद सरगी के बारे में जानकारी न हो तो बता दें कि सरगी में खाने की वो सामग्री होती है जो कि व्रत शुरू होने से पहले लिया जाता है. सरगी सूर्योदय से पहले ली जाती है क्योंकि सूर्योदय के बाद व्रत शुरू हो जाता है और फिर दिनभर महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं. रात के समय चंद्रोदय पर अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खुलता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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