First Karwa Chauth Vrat: कब और किसने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत? जानें कैसे हुई शुरुआत?

First Karwa Chauth Vrat: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं और इस व्रत को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं.

Published date india.com Published: October 30, 2023 2:01 PM IST
First Karwa Chauth Vrat: कब और किसने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत? जानें कैसे हुई शुरुआत?

First Karwa Chauth Vrat: हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. इस बार पंचांग के अनुसार यह व्रत 1 नवंबर 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा. (Karwa Chauth 2023) हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के बीच इस व्रत का विशेष महत्व है. करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है और कहते हैं कि इस व्रत को रखने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है. करवा चौथ के दिन म​हिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं. इसलिए करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा का खास महत्व माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं करवा चौथ का व्रत कब और किसने सबसे पहले रखा था?

किसने रखा था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत?

पौराणिक कथाओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था और कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें अपार सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. कहते हैं कि तभी से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं.

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ. इस युद्ध में अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी देवताओं को असुरों से हार का सामना करना पड़ा. जिसके बाद ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं की पत्नियों से कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत रखने को कहा. सभी ने यह व्रत रखा जिसके प्रभाव से देवताओं ने राक्षसों को हराकर विजय प्राप्त की. जिसके बाद देवताओं की पत्नियों ने अपना व्रत खोला. कहते हैं कि तभी से महिलाएं अपने पति की रक्षा, लंबी और सफलता की कामना से करवा चौथ का व्रत रख रही हैं. इसे भी पढ़ें: Karwa Chauth 2023: सरगी के साथ होती है करवा चौथ व्रत की शुरुआत, जानिए महत्व और सरगी खाने का शुभ मुहूर्त

महाभारत से करवा चौथ का रिश्ता

करवा चौथ के व्रत को लेकर एक लोकप्रिय कथा महाभारत काल से भी जुड़ी हुई है. जिसके अनुसार एक बार पांडव नीलगिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे थे तब उन्हें कई प्रकार की परेशानियों को सामना करना पड़ा. तपस्या में आ रही बाधाओं को देखकर उनकी पत्नी द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी. तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखने को कहा. इस व्रत के परिणाम स्वरूप पांडवों को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिली.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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