Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ व्रत के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Karwa Chauth Vrat Katha: आज 1 नवंबर बुधवार को देशभर में करवा चौथ का त्यौहार मनाया जाएगा. सनातन धर्म में कोई भी व्रत बिना कथा पूजा नहीं माना जाता. इसलिए अगर आप करवा चौथ का व्रत रख रही हैं तो पूजा के बाद यह कथा जरूर पढ़ें.

Published date india.com Updated: November 1, 2023 9:41 AM IST
Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ व्रत के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Karwa Chauth Vrat Katha: वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ व्रत रखा जाता है. इस वर्ष यह 01 नवंबर 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा. इस विशेष दिन पर सुहागिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. (Karwa Chauth 2023) इस दिन माता गौरी का पूजन (Gauri Pujan) किया जाता है और उनसे प्रार्थना की जाती है कि वह दांपत्य जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद दें. करवा चौथ (Karwa Chauth) के दिन पूजा के दिन व्रत कथा जरूर पढ़नी चाहिए क्योंकि बिना कथा व्रत पूरा नहीं होता.

करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha)

प्राचीन समय में करवा नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ एक गांव में रहती थी. उसका पति नदी में स्नान करने गया. नदी में नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया. उसने पत्नी को सहायता के लिए पुकारा. करवा भागकर अपने पति के पास पहुंची और तत्काल धागे से मगरमच्छ को बांध दिया. उसका सिरा पकड़कर करवा पति के साथ यमराज के पास तक पहुंच गई. यमराज के साथ प्रश्न उत्तर के बाद करवा के साहस को देखते हुए यमराज को उसके पति को वापस करना पड़ा.

जाते समय उन्होंने करवा को सुख-समृद्धि के साथ वर भी दिया- ‘जो स्त्री इस दिन व्रत करके करवा को याद करेगी, उनके सौभाग्य की मैं रक्षा करूंगा.’ इस कथा में करवा ने अपने सशक्त मनोबल से अपने पति के प्राणों की रक्षा की. मान्यता है कि जिस दिन करवा ने अपने पति के प्राण बचाए थे, उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी थी.

व्रत रखने का अर्थ ही है संकल्प लेना. वह संकल्प चाहे पति की रक्षा का हो, परिवार के कष्टों को दूर करने का या कोई और. यह संकल्प वही ले सकता है, जिसकी इच्छा शक्ति मजबूत हो. प्रतीकात्मक रूप में करवा चौथ पर महिलाएं अन्न-जल त्याग कर यह संकल्प लेती हैं और अपनी इच्छा शक्ति की परख करती हैं. यह पर्व संकेत देता है कि स्त्री अबला नहीं, बल्कि सबला है और वह भी अपने परिवार को बुरे वक्त से उबार सकती है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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