जम्मू-कश्मीर का खीर भवानी मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है. लोग दूर-दूर से यहां दर्शनों के लिए पहुचंते हैं. पर ये मंदिर आखिर खास क्‍यों है?

आपने देखा होगा कि जम्‍मू-कश्‍मीर के गांदरबल जिले में वार्षिक उत्सव में शामिल होने के लिए कश्मीरी पंडित हजारों की संख्‍या में पहुंचते हैं. इस साल भी ऐसा ही नजारा रहा. अधिकारियों ने बताया कि 85 बसें रविवार देर रात मंदिर में प्रार्थना के लिए तीर्थयात्रियों को लेकर पहुंचीं थीं.

पवित्र झरने पर बने देवी खीर भवानी मंदिर के दर्शनों के लिए सुबह से ही बसों, टैक्सियों, निजी कारों और यहां तक कि दोपहिया वाहनों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा था.

श्रीनगर शहर से तुल्लामुल्ला तक 25 किलोमीटर लंबा मार्ग पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के टुकड़ियों द्वारा सुरक्षित किया गया.

एक अधिकारी ने कहा, ‘मंदिर परिसर में सुरक्षित पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छता जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं’.

मंदिर का इतिहास
मंदिर में शांति व खुशहाली के लिए लोग प्रार्थना करते हैं. कश्मीर घाटी में स्थित खीर भवानी मंदिर हिंदू देवी रगन्या को समर्पित है. मान्यता है कि माता रगन्या रावण शासन के दौरान श्रीलंका से कश्मीर आई थीं.

बदल जाता है पानी का रंग
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से महज 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांदरबल जिले के तुल्मुल्ला शहर के माता रगन्या मंदिर के बारे में कई पौराणिक मान्यताएं भी हैं. इस मंदिर में स्थित एक जलस्रोत के बारे में कहा जाता है कि यह कश्मीर की घटनाओं की भविष्यवाणी करता है. कश्मीरी पंडित माता रगन्या के मंदिर के इस जलस्रोत को पवित्र मानते हैं. इनका मानना है कि वार्षिक मेले के अवसर पर जलस्रोत के पानी का रंग वर्ष के दौरान कश्मीर में घटनाओं की स्थिति की भविष्यवाणी करता है.