खरमास 2019: भारतीय ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन और जिंदगी में घटित होने वाली प्रत्येक घटना पर पड़ता है. इसके चलते कई बार लाभ होता है तो कई मर्तबा नुकसान भी उठाना पड़ता है. ये लाभ और हानि इस बात पर निर्भर करती है की ग्रहों के चाल के मुताबिक कौन से कार्य सही समय पर किये गए हैं और कौन से कार्य गलत समय पर?

ग्रहों की इन्ही स्थितियों में से एक है मलमास जिसे लोग खरमास भी कहते हैं. जिस प्रकार श्राद्ध और चातुर्मास में किसी भी तरह के शुभ और नए कार्य करना वर्जित होता है उसी तरह खरमास में भी विशेष कार्यों को वर्जित माना जाता है. पंचांग 2019 के अनुसार 15 मार्च को सूर्य बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश कर रहा है जिसके साथ ही खरमास 2019 प्रारंभ हो जाएगा. जो कि एक महीने तक रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, 15 मार्च 2019 शुक्रवार को प्रातः 05:55 बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा. जिसके बाद अगले एक महीने तक कोई मांगलिक कार्य नहीं किये जाएंगे.

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कब तक रहेगा खरमास
पंचांग के अनुसार, 14 अप्रैल 2019 रविवार दोपहर 02:25 बजे तक सूर्य मीन राशि में भ्रमण करेंगे. दोपहर 02:25 बजे के बाद सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ विवाह, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य भी दोबारा शुरू हो जाएंगे.

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खरमास प्रारंभ: 15 मार्च 2019 शुक्रवार को प्रातः 05:55 बजे
खरमास समाप्त: 14 अप्रैल 2019 रविवार दोपहर 02:25 बजे

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मलमास में भूलकर भी न करें ये काम
मलमास (खरमास) में कोई मांगलिक कार्य जैसे–शादी, सगाई, वधु प्रवेश, द्विरागमन, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ आदि नहीं किये जाते. क्यूंकि इस दौरान सूर्य गुरु की राशि में रहता है, जिसके कारण गुरु का प्रभाव कम हो जाता है और मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत जरुरी है. क्‍योंकि बृहस्पति जीवन के वैवाहिक सुख और संतान देने वाला होता है. मलमास के दौरान, गंगा और गोदावरी के साथ-साथ उत्तर भारत के उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, राज्यों में सभी मांगलिक कार्य व यज्ञ करना निषेध होता है, जबकि पूर्वी व दक्षिण प्रदेशों में इसे दोष नहीं माना गया है.

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