खरमास 2019: ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना पर पड़ता है. इसके कारण कई बार लाभ मिलता है तो कई मर्तबा हानि भी झेलनी पड़ती है. ये लाभ और हानि इस बात पर निर्भर करती है कि ग्रहों के चाल के मुताबिक कौन से कार्य सही समय पर किये गए हैं और कौन से कार्य गलत समय पर? ग्रहों की इन्हीं स्थितियों में से एक है मलमास जिसे लोग खरमास भी कहते हैं. जिस प्रकार श्राद्ध और चातुर्मास में किसी भी तरह के शुभ और नए कार्य करना वर्जित होता है, उसी तरह खरमास में भी विशेष कार्यों को वर्जित माना जाता है. इस बार खरमास या मलमास 16 दिसंबर को शुरू हो रहा है, जो कि मकर संक्रांति यानी 14/15 जनवरी 2020 पर खत्म होगा.

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जानिए क्या है खरमास या मलमास 
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य हर एक राशि में पुरे एक महीने या 30 से 31 दिन के लिए रहता है. 12 महीनों में सूर्य ज्योतिष की 12 राशियों में प्रवेश करता है. 12 राशियों में भ्रमण करते हुए जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करता है तो उस स्थिति को खरमास कहते हैं. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर सभी शुभ कार्य एक महीने के लिए बंद हो जाते हैं. जब सूर्य मकर संक्रांति के दिन धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. इस तरह से साल में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य के राशि में प्रवेश करने पर शुभ कार्य बंद हो जाते हैं.

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कब लग रहा खरमास या मलमास
खरमास प्रारंभ: 16 दिसंबर 2019 सोमवार रात्रि 12:37 बजे
खरमास समाप्त: 15 जनवरी 2020 बुधवार प्रात: 08:24 बजे

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खरमास या मलमास में भूलकर भी न करें ये काम
हिन्दू पंचांग के मुताबिक, मलमास (खरमास) में कोई मांगलिक कार्य जैसे- शादी, सगाई, वधु प्रवेश, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ आदि नहीं किये जाते. क्यूंकि इस दौरान सूर्य गुरु की राशि में रहता है, इसके कारण गुरु का प्रभाव कम हो जाता है और मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत जरुरी है. क्‍योंकि बृहस्पति जीवन के वैवाहिक सुख और संतान देने वाला होता है.

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