नई दिल्ली: जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते हैं, उस समय को खरमास कहा जाता है. पौष खरमास का मास है, जिसमें किसी भी तरह के मांगलिक कार्य, विवाह, यज्ञोपवित या फिर किसी भी तरह के संस्कार नहीं किए जाते हैं. तीर्थ स्थल की यात्रा करने के लिए खरमास सबसे उत्तम मास माना गया है. इस महीने खरमास 15 दिसंबर 2020 को सूर्य का धनु राशि में प्रवेश होने जा रहा है. सूर्य का धनु राशि में गोचर आरंभ होते ही खरमास लग जाएगा. Also Read - Malmas 2020-21: शुरू हुआ खरमास, नहीं होंगे मांगलिक कार्य, जानें कब तक रखना होगा संयम

खरमास (Kharmas 2020) की पौराणिक कथा Also Read - Kharmas 2020: शुरू होने वाला है खरमास का महीना, जानें इस महीने में क्या काम करें और क्या नहीं

खरमास को खर मास कहने के पीछे भी पौराणिक कथा है. खर का तात्पर्य गधे से है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सूर्य अपने सात घोड़ों यानी रश्मियों के सहारे इस सृष्टि की यात्रा करते हैं. परिक्रमा के दौरान सूर्य को एक क्षण भी रुकने और धीमा होने का अधिकार नहीं है. लेकिन अनवरत यात्रा के कारण सूर्य के सातों घोडे़ हेमंत ऋतु में थककर एक तालाब के निकट रुक जाते हैं, ताकि पानी पी सकें. सूर्य को अपना दायित्व बोध याद आ जाता है कि वह रुक नहीं सकते, चाहे घोड़ा थककर भले ही रुक जाए. यात्रा को अनवरत जारी रखने के लिए तथा सृष्टि पर संकट नहीं आए, इसलिए भगवान भास्कर तालाब के समीप खड़े दो गधों को रथ में जोतकर यात्रा को जारी रखते हैं. गधे अपनी मंद गति से पूरे पौष मास में ब्रह्मांड की यात्रा करते रहे, इस कारण सूर्य का तेज बहुत कमजोर हो धरती पर प्रकट होता है. मकर संक्रांति के दिन पुन: सूर्यदेव अपने घोड़ों को रथ में जोतते हैं, तब उनकी यात्रा पुन: रफ्तार पकड़ लेती है. इसके बाद धरती पर सूर्य का तेजोमय प्रकाश बढ़ने लगता है. Also Read - Kharmas 2020: आज से खरमास शुरू, एक माह के समय में बरतें ये सावधानियां, क्‍या करें-क्‍या नहीं

मकर संक्रांति से होगा खरमास का समापन

खरमास का समापन मकर संक्रांति पर होगा. मकर संक्रांति का पर्व पंचांग के अनुसर 14 जनवरी 2021 को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक और शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे.