Eid Ul Fitra 2020: चाँद का दीदार हो गया है. देश में ईद सोमवार को मनाई जाएगी. ईद के चाँद का दीदार होते ही एक दूसरे को लोग मुबारकबाद दे रहे हैं. रमज़ान के पूरे 30 दिन बाद ईद का मौका आता है. लॉकडाउन और कोरोना के चलते लोग हमेशा की तरह तैयारियों के लिए बाज़ारों की ओर तो नहीं भाग रहे हैं, लेकिन घरों में पकवान बनाने की तैयारयाँ शुरू हो गई हैं. Also Read - किसानों को शिक्षित करने में कृषि विज्ञान केंद्रों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

दुनिया भर के मुस्लिमों के लिए बेहद ख़ुशी का दिन
पूरी दुनिया के मुसलामानों के लिए ईद का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है. मुस्लिम जगत के लिए ईद का अलग ही महत्व है. दुनिया के करीब 2 अरब मुस्लिम रमजान के लिए बाद इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं. हालाँकि इस बार लॉकडाउन है, तो ईद का जश्न फीका है. लोग ईदगाह में नमाज़ भी एक साथ नहीं पढ़ पाएंगे, मस्जिदें भी बंद हैं. Also Read - CBSE Syllabus: सीबीएसई ने सिलेबस से 30% कटौती के दौरान हटाए जीएसटी, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता के अध्याय

क्यों मनाते हैं ईद (Why Celebrated Eid)
ईद क्यों मनाई जाती है, इसका जवाब आज से करीब 1400 पहले हुए एक वाकये में मिलता है. इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगम्बर मोहम्मद (Prophet Mohammad) अरब में अच्छाइयों का प्रसार कर रहे थे. लोगों को बुराइयों से आगाह कर रहे थे. अरब में बहुत सारे लोग बुत परस्ती और कई तरह की गलत चीज़ों में व्याप्त थे. पैगम्बर ने जब तबलीग शुरू की, बहुत से लोग उनका विरोध करने लगे. वह उनकी मुखालफत करने लगे. Also Read - CBSE ने सिलेबस से हटाए GST, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता के अध्याय, बच्चे फिलहाल नहीं पढ़ेंगे ये पाठ

क्या है जंग-ए-बद्र (Jung-e-badr)
सन 624 में स्थिति जंग तक पहुंच गई. सऊदी अरब के मदीना से करीब 200 किलोमीटर दूर एक इलाके में जंग हुई. पैगम्बर मोहम्मद के साथ करीब 313 अनुयायी थे. जबकि उनका विरोध करने वाले अबू जहल के साथ बड़ी सेना, हाथी, घोड़े सब थे. अबू जहल मुस्लिमों का नामो निशाँ मिटा देना चाहता था. भयंकर जंग हुई और इसके कम लोगों का साथ होने के बाद भी पैगम्बर मोहम्मद ने जंग जीत ली. जंग जब हुई तब रमजान के दिन थे और पैगम्बर मोहम्मद का साथ दे रहे सभी लोग रोजे से थे. साथ में कम लोग होने के बाद भी पैगम्बर मोहम्मद की जीत हुई. इस्लाम के इतिहास की पहली जंग थी. और इसी जीत की ख़ुशी में जश्न मनाया गया. लोगों में मीठा बांटा गया. और इस तरह ईद की शुरुआत हुई. तभी से इस्लामिक कैलेंडर के 10वां महीना शव्वाल का पहले दिन जश्न के रूप में मनाया जाने लगा. रमजान के आखिरी दिन चाँद नज़र आने के ठीक अगले दिन ईद मनाई जाती है. ये जंग जहां लड़ी गई वहां बद्र नाम का एक कुआं था. इसीलिए इस जंग का नाम जंग-ए-बद्र पड़ा.

भाईचारे का पैगाम देता है ये त्यौहार
30 दिन तक कठिन रोजे रखने के बाद रोजेदारों के लिए ईद की अलग ही ख़ुशी होती है. इस दिन लोग एक दूसरे के गले मिलकर आपस में मन मुटाव ख़त्म कर लेते हैं. ईद से पहले फितरा (दान) देकर ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं. ताकि कोई ईद की खुशियों से अछूता न रह जाए. ईद का त्योहार सब को साथ लेकर चलने की बात पर जोर देता है, इसलिए फितरा-जकात (दान) को हर मुसलमान पर फर्ज बताया गया है.