नई दिल्ली: आषाढ़ पूर्णिमा के दिन कोकिला व्रत मनाया जाता है. इस माह कोकिला व्रत आज यानी 4 जुलाई शनिवार के दिन है. आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि से कोकिला व्रत आरंभ हो रहा है. इस व्रत का महत्‍व कुवांरी कन्‍याओं के लिए होता है. इस व्रत को पूरे मन से रखने पर उन्‍हें योग्‍य वर की प्राप्‍ति होती हैं. शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं. इस व्रत में आदिशक्ति के स्वरूप कोयल की पूजा करने का विधान है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. साथ ही शादी में आ रही बाधा दूर हो जाती है और योग्य वर मिलता है. खासकर, अविवाहित लड़कियों को यह व्रत जरूर करना चाहिए.

कोकिला व्रत मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – जुलाई 04, 2020 को 11:33 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – जुलाई 05, 2020 को 10:13 ए एम बजे

कोकिला व्रत का महत्व

मान्यता के अनुसाार, इस व्रत को रखने से लड़कियों को अच्‍छे पति की प्राप्‍ति होती है. वहीं अगर विवाहित महिलाएं इस व्रत को रखती हैं तो उनके पति की आयु बढ़ती है. यही नहीं इस व्रत को करने से सुंदरता भी बढ़ती है क्‍योंकि इस व्रत में इंसान को विशेष जड़ी बूटियों से नहाना होता है.

कोकिला व्रत कथा

अनंतकाल में राजा दक्ष के घर आदिशक्ति का सती रूप में जन्म हुआ. इसके बाद उनका पालन पोषण उनके पिता के द्वारा किया गया, किंतु जब बात सती की शादी की आई तो राजा दक्ष के न चाहने के बावजूद माता सती ने भगवान शिव से शादी कर ली. इसके कुछ समय बाद एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ किया, जिसमें माता सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया. भगवान शिव को जब माता सती के सतीत्व का पता चला तो उन्होंने माता सती को शाप दिया कि आपने मेरी इच्छाओं के विरुद्ध जाकर आहुति दी. अतः आपको भी वियोग में रहना पड़ेगा. उस समय भगवान शिव ने उन्हें 10 हजार साल तक कोयल बनकर वन में भटकने का श्राप दिया. कालांतर में माता सती कोयल बनकर 10 हजार साल तक वन में भगवान शिव की आराधना की. इसके बाद उनका जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ.