Happy Krishna Janmashtami 2018: आज से गोकुलाष्‍टमी यानी कृष्‍ण जनमाष्‍टमी का पर्व शुरू हो गया है. भगवान कृष्‍ण का जन्‍म पारंपरिक हिंदू चंद्र कैलेंडर द्वारा गणना की जाती है. भादो मास के कृष्‍ण पक्ष में अष्‍टमी त‍िथ‍ि को रोण‍िनी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्‍ण का जन्‍म रात 12 बजे हुआ था. तभी से आज के द‍िन कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का त्‍योहार बनाया जाने लगा. पश्‍च‍िमी या अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का त्‍योहार अगस्‍त या स‍ितंबर में आता है.Also Read - कोरोना काल में मंदिर के पट रहेंगे बंद, इस तरह होगा भगवान कृष्ण का जन्म, जानिए

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इस बार गोकुलाष्‍टमी 2 स‍ितंबर को मनाया जा रहा है. लेकि‍न वैष्‍णव 3 स‍ितंबर को जन्‍माष्‍टमी का त्‍योहार मनाया जाएगा. दही हांडी कार्यक्रम भी 3 स‍ितंबर को ही मनाया जाएगा. अगर आप अष्‍टमी व्रत करते हैं तो आप 3 स‍ितंबर को व्रत रख सकते हैं, क्‍योंक‍ि अष्‍टमी त‍िथ‍ि 3 स‍ितंबर को ही है. Also Read - krishna Janmashtami 2019: श्री कृष्‍ण की 19 सीखें, जो जीवन बदल देंगी...

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गोकुलाष्‍टमी का महत्‍व:

ह‍िन्‍दू मान्‍यता के अनुसार धरती पर जब जब अधर्म का बोझ बढ़ा है भगवान ने अवतार लेकर उसका नाश क‍िया है. भगवान व‍िष्‍णु ने बार-बार धरती पर जन्‍म लेकर मानव जात‍ि की रक्षा की है. द्वापर युग में जब दुष्‍ट राक्षसों का भार बढ़ गया तब भगवान व‍िष्‍णु ने 8वां अवतार ल‍िया था. भगवान व‍िष्‍णु का यह अवतार इस बात का प्रतीक है क‍ि अधर्म पर हमेशा धर्म की ही व‍िजय होती है.

भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍म के द‍िन को ही कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी कहते हैं और कृष्‍ण का पूरा बचपन गोकुल में बीता इसल‍िए इसे गोकुलाष्‍टमी के नाम से बुलाया जाता है.

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अपने जीवन में श्रीकृष्‍ण ने कई राक्षसों और दुष्‍ट मानवों का संहार क‍िया. अर्जुन जब युद्ध के मैदान में अपनों को देखकर व‍िचल‍ित हो गए और युद्ध के मैदान में न‍िराश हो गए, तब भगवान श्रीकृष्‍ण ने उन्‍हें यह उपदेश द‍िया और यह समझाया क‍ि युद्ध करना क्‍यों जरूरी है.

उन्‍होंने अर्जुन को समझाया क‍ि इस युद्ध को तुमने नहीं, स्‍वयं भगवान ने तय क‍िया है. इसकी तारीख और समय पहले से तय है. इस युद्ध को लड़ना तुम्‍हारा धर्म और कर्तव्‍य है, और कर्तव्‍य का पालन करना अन‍िवार्य है. इस बात की व्‍याख्‍या गीता में भी की गई है.

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श्रीकृष्‍ण ने अपने अनुयाय‍ियों को जीवनभर प्रेर‍ित क‍िया. ना केवल भारत में बल्‍क‍ि पूरे व‍िश्‍व में श्री कृष्‍ण के अनुयायी मौजूद हैं.

गोकुलाष्‍टमी के द‍िन लोग श्रीकृष्‍ण के प्रत‍ि अपने प्रेम को समर्प‍ित करते हैं. श्रीकृष्‍ण का जन्‍म आधी रात को हुआ था, इसल‍िए उनका जन्‍मदि‍न भी आधी रात को ही मनाया जाता है.

जन्‍माष्‍टमी के द‍िन लोग बाल गोपाल को सजाते हैं, उनके लि‍ए गीत और भजन गाते हैं और ब‍िल्‍कुल एक बच्‍चे की तरह उनकी सेवा करते हैं, उनका स्‍नान कराते हैं और उन्‍हें जन्‍मद‍िवस के लि‍ए तैयार करते हैं.

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श्रीकृष्‍ण के कुछ भक्‍त इस द‍िन व्रत रखते हैं तो कुछ भगवान श्रीकृष्‍ण की मन से ही अराधना कर संतुष्‍ट होते हैं. यह त्‍योहार अधर्म पर धर्म के व‍िजय के रूप में मनाया जाता है. यह याद द‍िलाता है क‍ि आपको जीवन में हमेशा सही रास्‍ते का ही चुनाव करना चाह‍िए. लोभ, ईर्श्‍या और घमंड के रास्‍ते से दूर शांत‍ि, प्रेम और सच्‍चाई के रास्‍ते पर ही चलना चाह‍िए.

जब कभी लगे क‍ि धरती पर अधर्म बढ़ गया है, तो भगवान श्रीकृष्‍ण को याद करें, वह दुष्‍टों का संहार जरूर करें.

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