ललितपुर: 3 सितंबर को जन्माष्टमी है. जन्माष्टमी पर मथुरा-वृन्दावन में धूम है. वहां विशेष तैयारियां की जा रही हैं. भगवान कृष्ण का उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के ललितपुर जिले से भी गहरा नाता रहा है. ललितपुर ही वह जगह है जहां मुचुकुंद गुफा में भगवान श्रीकृष्ण ने कालयवन का वध कराया था. भगवान श्रीकृष्ण की चतुराई से महाराज मुकुचुंद ने कालयवन को भस्म कर दिया था. मंदिर की गुफा के पहाड़ से आज भी चमत्कारिक तरीके से पानी रिसता है. इससे पानी के कुंड भर जाता है. हजारों सालों से बुंदेलखंड का यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. Also Read - CMO के ड्राइवर ने की सुसाइड, मौत से पहले वीडियो में UP के मंत्री पर लगाया 20 लाख रुपए लेने का आरोप

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मंदिर की बेहद मान्यता है.

मंदिर की बेहद मान्यता है.

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ये है इतिहास

पुराणों के अनुसार मगध के शासक जरासंध ने मथुरा पर हमला करा दिया. हमले के लिए जरासंध ने शिवजी से अजेय का वरदान प्राप्त कालयवन को भेजा. वरदान के कारण श्रीकृष्ण ने कालयवन को नहीं मारा. कालयवन से भयंकर युद्ध चल रहा था. युद्ध के दौरान वह रण छोड़ कर ललितपुर के धौजरी के पास पर्वत पर स्थित एक गुफा में आकर छुप गए. गुफा में उस समय मुचुकुंद ऋषि तपस्या कर रहे थे. और उन्हें वरदान था कि उनकी द्रष्टि सबसे पहले जिस पर पड़ेगी वह भस्म हो जाएगा. श्रीकृष्ण ने अपना पहने पीला वस्त्र मुचुकुंद ऋषि के ऊपर डाल दिया. और गुफा में ही छिप गए. भगवान कृष्ण का पीछा करते हुए कालयवन गुफा तक आ पहुंचा.

इसके पहाड़ों से आज भी पानी रिसता है.

इसके पहाड़ों से आज भी पानी रिसता है.

 

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इस घटना से भगवान श्रीकृष्ण का नाम पड़ा रणछोड़

कालयवन ने पीले वस्त्र में तपस्या कर रहे मुचुकुंद ऋषि को श्रीकृष्ण समझा और भगवान कृष्ण के धोखे में मुचुकुंद ऋषि को मारना शुरू कर दिया. ऋषि मुचुकुंद ने जैसे ही आंख खोली उनकी द्रष्टि हमला कर रहे कालयवन पर पड़ी. इससे वह भस्म हो गया. इस तरह से श्रीकृष्ण ने बिना स्वयं मारे ही कालयवन का वध करा दिया. इस घटना के बाद से युद्ध भूमि छोड़ ललितपुर की इस गुफा में आने के कारण भगवान श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ पड़ गया.

मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

आज भी पहाड़ से रिसता है पानी

जानकार हरीगोविन्द कुशवाहा बताते हैं कि द्वापर युग की इस घटना की साक्षी ललितपुर के धौजरी के पास विध्यांचल पर्वत की गुफा आज भी मौजूद है. इस गुफा को मुकुचुंद गुफा कहते है. वह बताते हैं कि भगवत पुराण में यह घटना और इस स्थान का नाम दर्ज है. यह स्थान लोगों के लिए अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. इस पहाड़ से आज भी पानी रिसता रहता है. यह पानी एक कुंड में भर जाता है. लोगों का मानना है कि यह चमत्कार है. लोग इसका पानी ले घर ले जाते हैं.